
विशेष न्यायाधीश विभा पाण्डेय की अदालत ने गवाहों के बयान और पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर प्रभाकर राव और उसकी पत्नी राजे कांगे को बलवे की धारा 147 के तहत 2-2 साल की कैद और विधि विरुद्ध क्रिया-कलाप निवारण अधिनियम की धारा 38(2) व 39(2) के तहत 7-7 साल के सश्रम कठोर कारावास की सजा सुनाई।
वहीं, शीर्ष नक्सलियों को पनाह और मदद देने वाले श्यामनाथ उसेंडी और रमेश कुमेटी को यूएपीए की धारा 19 के तहत 5-5 साल कैद की सजा दी गई है। इसके अलावा बोलेरो व बाइक से घुमाने और छिपाने में मदद करने वाले चिंतु ताम्रकार को आईपीसी की धारा 212 के तहत 2 साल की कैद और अर्थदंड से दंडित किया गया है।
घटना के 9 साल बाद हाथ आए थे पति-पत्नी: सितंबर 2015 में कोरर थाना क्षेत्र के भैंसगांव-नागर मादी पहाड़ी पर सर्चिंग के लिए निकली पुलिस पार्टी पर प्रभाकर राव उर्फ बालमुरी नारायण, उसकी पत्नी राजे कांगे उर्फ निर्मला उर्फ मालती और उनके हथियारबंद साथियों ने अंधाधुंध फायरिंग की थी। जवानों की जवाबी कार्रवाई के बाद दोनों जंगल का फायदा उठाकर फरार हो गए थे। पुलिस ने इनके खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की थी।
घटना के 9 साल बाद दिसंबर 2024 में सुरक्षाबलों ने प्रभाकर को अंतागढ़ इलाके से दबोचा। इसके बाद उसकी पत्नी राजे कांगे भी पकड़ी गई। पूछताछ में सामने आया कि कौड़ो साल्हेभाट (कोयलीबेड़ा) निवासी श्याम नाथ उसेंडी ने दोनों को अपने घर में पनाह दी थी। वहीं, कड़मे सिकसोड़ निवासी चिंतु ताम्रकार और दुर्गूकोंदल निवासी रमेश कुमेटी इन्हें बाइक और बोलेरो में घुमाने व रसद पहुंचाने का काम करते थे। एनआईए ने जांच पूरी कर कोर्ट में चार्जशीट पेश की थी, जिस पर अदालत ने यह अहम फैसला सुनाया।
प्रभाकर पर 64 और राजे पर 36 अपराध दर्ज | नक्सली प्रभाकर राव के खिलाफ कांकेर जिले के अलग-अलग थानों में 64 मामले दर्ज हैं। उसकी पत्नी राजे कांगे के खिलाफ 36 मामले दर्ज हैं। इनमें हत्या, हत्या की कोशिश, लूट समेत अन्य मामले हैं। प्रभाकर के खिलाफ 25 लाख रुपए का इनाम भी घोषित था। राजे कांगे पर 8 लाख रुपए का इनाम था। दोनों पति-पत्नी 40 साल से नक्सली संगठन में सक्रिय थे।