बड़ी जीत! उत्तरकाशी टनल से 15 मजदूर निकाले गए, सभी मजदूर स्वस्थ्य

Chhattisgarh Crimes

उत्तरकाशी। उत्तराखंड की सिल्क्यारा-डंडालगांव टनलमें 12 नवंबर से फंसे 41 मजदूरों का बाहर निकलना शुरू हो गया है। 15 मजदूर बाहर निकाल लिए गए हैं। पहला मजदूर शाम 7.50 बजे बाहर निकाला गया था। उन्हें एम्बुलेंस से अस्पताल भेजा गया। बाकी को भी जल्द बाहर निकाला जाएगा। रेस्क्यू टीम के सदस्य हरपाल सिंह ने बताया कि शाम 7 बजकर 5 मिनट पर पहला ब्रेक थ्रू मिला था। जल्द ही सभी मजदूर बाहर आ जाएंगे।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बाहर निकाले गए श्रमिकों से बात की। उनके साथ केंद्रीय मंत्री वीके सिंह भी थे। मजदूरों ने बाहर निकलकर राहत के सांस ली। उनके चेहरे पर दूसरी जिंदगी मिलने की खुशी साफ देखी जा रही है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और केंद्रीय मंत्री वीके सिंह ने उनकी अगवानी की। रेट स्नेपर्स वाली कंपनी नवयुग के मैन्युअल ड्रिलर नसीम ने कहा- सभी मजदूर स्वस्थ्य हैं। मैंने उनके साथ सेल्फी ली। उन्होंने बताया कि जब आखिरी पत्थर हटाया गया तो सभी ने जयकारे लगाए।

बड़ी मशीने फेल हुईं, रैट माइनर्स ने दिखाया कमाल

इस रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान तमाम बड़ी मशीनें फेल होती नजर आईं लेकिन रैट माइनर्स ने काफी कमाल दिखाया। ऑगर मशीन, वर्टिकल ड्रिलिंग, रैट माइनर्स की सहायता से इस रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। इस दौरान खुदाई करके पाइप डाले गए।

रेस्क्यू के दौरान एक समय ऐसा भी आया, जब अमेरिकी ऑगर मशीन भी फंस गई और फिर रैट माइनर टीमों ने वहीं से मैन्युअल ड्रिलिंग शुरू की। इन लोगों ने आगे की खुदाई हाथ से की, जिसके लिए इनके पास हथौड़ा, साबल और खुदाई करने वाले कई टूल्स थे।

रैट माइनिंग क्या है?

यह माइन‍िंग का एक तरीका है जिसका इस्‍तेमाल करके संकरे क्षेत्रों से कोयला निकाला जाता है। ‘रैट-होल’ टर्म जमीन में खोदे गए संकरे गड्ढों को दर्शाता है। यह गड्ढा आमतौर पर सिर्फ एक व्यक्ति के उतरने और कोयला निकालने के लिए होता है।

एक बार गड्ढे खुदने के बाद माइनर या खनिक कोयले की परतों तक पहुंचने के लिए रस्सियों या बांस की सीढ़ियों का उपयोग करते हैं। फिर कोयले को गैंती, फावड़े और टोकरियों जैसे आदिम उपकरणों का इस्‍तेमाल करके मैन्युअली निकाला जाता है।

 

Exit mobile version