
लेकिन छत्तीसगढ़ में सरकार अब तक पेनाल्टी अधिसूचित नहीं कर सकी। इसका नतीजा यह है कि नगर निगम और नगर पालिकाएं खुले में कचरा फेंकने, निर्माण मलबा सड़क पर डालने, कचरा पृथक्करण नहीं करने वाले संस्थानों और बड़े कचरा उत्पादकों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं।
अधिकारी नोटिस और समझाइश तक सीमित हैं।अधिकारियों का कहना है कि बिना अधिसूचित पेनाल्टी के जुर्माना लगाने का कानूनी आधार कमजोर पड़ सकता है। वहीं पुराने नियमों के तहत कार्रवाई करने पर भी विवाद की आशंका है। छत्तीसगढ़ में फाइल अब भी अंतिम निर्णय का इंतजार कर रही है।
सालिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स-2026 में कई कड़े प्रावधान किए गए हैं। जैसे अब गीला और सूखा कचरे के लिए सिर्फ दो डिब्बे की जगह चार डिब्बे रखने होंगे। इसके अलावा रोज 100 किलो से ज्यादा कचरा उत्पादन करने वाले संस्थानों को खुद ही कचरा प्रोसेसिंग करनी होगी।
सड़क, नालियों या खुले में कचरा फेंकना और कचरा जलाना पूरी तरह मना है। ऐसा करने पर भारी जुर्माना (पर्यावरण मुआवजा) लगेगा। ये प्रावधान हैं। इनका पालन नहीं होने पर निकायों को पेनाल्टी लगानी है, लेकिन यही तय नहीं है।
इस तरह के होंगे डिब्बे
हरा डस्टबिन (गीला कचरा): रसोई से निकलने वाला कचरा, जैसे बचा हुआ खाना, फल, और सब्जियों के छिलके। नीला डस्टबिन (सूखा कचरा): रीसायकल होने वाले उत्पाद जैसे प्लास्टिक, कागज, गत्ते और धातु। लाल डस्टबिन (सैनिटरी कचरा): इसमें बायोमेडिकल और सैनिटरी कचरा आता है, जैसे उपयोग किए गए मास्क, दस्ताने, और नैपकिन। काला डस्टबिन (खतरनाक कचरा): घर से निकलने वाला घरेलू खतरनाक कचरा, जैसे एक्सपायर्ड दवाएं, केमिकल, और पेंट।
लोगों पर क्या असर? खुले में कचरा फेंकने वालों पर कार्रवाई स्पष्ट नहीं। घरों, दुकानों और संस्थानों में कचरा पृथक्करण लागू कराने में कठिनाई। बल्क वेस्ट जनरेटर के खिलाफ कार्रवाई सीमित। कचरा प्रबंधन को लेकर जवाबदेही कमजोर।
निकायों की चुनौती बिना पेनाल्टी नोटिफाई हुए जुर्माना लगाने का जोखिम। पुराने नियमों के तहत कार्रवाई पर कानूनी विवाद की आशंका। नोटिस और समझाइश तक सीमित कार्रवाई। स्वच्छता नियमों के पालन में ढिलाई की संभावना।
क्या हैं नए नियमों का उद्देश्य?
- स्रोत पर गीले और सूखे कचरे का पृथक्करण।
- रिसाइक्लिंग और संसाधन पुनर्प्राप्ति को बढ़ावा। लैंडफिल पर निर्भरता कम करना।
- कचरे से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण।
- शहरी निकायों की जवाबदेही बढ़ाना।