
आरोपियों ने बड़े अधिकारियों से मुलाकात, फाइल प्रोसेसिंग, सुरक्षा मंजूरी और विदेशी जांच जैसे बहाने बनाए। भरोसा दिलाने के लिए पीड़ित को चेन्नई और नागपुर बुलाया गया, जहां केमिकल से काले नोटों को असली नोट में बदलकर दिखाया। इसके बाद अलग-अलग बहाने बनाकर किश्तों में 1.13 करोड़ रुपए ले लिए।
मोबाइल नंबर और बैंक खातों से हुई पहचान
शिकायत मिलने के बाद एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट और तेलीबांधा थाना पुलिस ने मोबाइल नंबर, बैंक खातों और डिजिटल सबूतों की जांच की। जांच में 2 महिला आरोपियों की पहचान हुई, जिन्हें नागपुर से गिरफ्तार कर लिया गया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कनिज फातमा उर्फ भावना पांडेय (कोलकाता) और दीपिका पालीवाल (उदयपुर, राजस्थान) के रूप में हुई है। उनके पास से 3 मोबाइल फोन, 26 हजार कैश, एटीएम कार्ड और आधार कार्ड जब्त किए गए हैं।
शुरुआती पूछताछ में पता चला है कि यह गिरोह नागपुर, लखनऊ समेत कई राज्यों में इसी तरह की ठगी कर चुका है। पुलिस अन्य राज्यों से भी जानकारी जुटा रही है। मामले में शामिल बाकी आरोपियों की तलाश जारी है।
खेप आने का बहाना बनाकर टालते रहे आरोपी
पीड़ित ने पुलिस को बताया कि रकम मिलने के बाद आरोपी लगातार नकली नोटों की खेप तैयार होने, सुरक्षा व्यवस्था और डिलीवरी में देरी का हवाला देकर कारोबारी को टालते रहे। काफी समय बीतने के बाद भी न तो नकली नोट मिले और न ही एडवांस की रकम वापस की गई। इसके बाद पीड़ित ने तेलीबांधा थाने में शिकायत दर्ज कराई।