
दरअसल, कांग्रेस प्रत्याशी रहे लेखराम साहू का आरोप है कि सरोज पांडेय ने चुनाव के दौरान दिए अपने शपथपत्र में बैंक अकाउंट की जानकारी छिपाई थी। इसी मामले में जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की सिंगल बेंच ने जवाब मांगा है।
दरअसल मार्च 2018 में छत्तीसगढ़ में राज्यसभा की एक सीट के लिए चुनाव हुआ था, जिसमें भाजपा ने सरोज पांडेय और कांग्रेस ने लेखराम साहू को मैदान में उतारा था। चुनाव के दौरान कांग्रेस प्रत्याशी ने सरोज पांडेय के नामांकन पत्र और शपथ पत्र पर सवाल उठाए थे।
बताया था कि सरोज पांडेय ने शपथ पत्र में कई महत्वपूर्ण जानकारियां छिपाई थीं। हालांकि, तत्कालीन निर्वाचन अधिकारी ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया था। इसके बाद मामला केंद्रीय चुनाव आयोग और राज्यपाल तक भी पहुंचा, लेकिन मतदान हुआ और सरोज पांडेय विजयी घोषित हुईं।
कांग्रेस उम्मीदवार ने निर्वाचन को दी है चुनौती
चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद पराजित उम्मीदवार लेखराम साहू ने शपथपत्र में गलत जानकारी देने और कथित रूप से अपात्र विधायकों को मतदान की अनुमति दिए जाने को आधार बनाकर सरोज पांडे के राज्यसभा निर्वाचन को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। यह याचिका लंबे समय से लंबित है और इस पर नियमित सुनवाई जारी है।
RTI में बैंक खाते के अस्तित्व से इनकार
लेखराम साहू का आरोप है कि भाजपा नेत्री सरोज पांडेय ने 2018 के राज्यसभा चुनाव के दौरान निर्वाचन आयोग को दिए गए अपने शपथ पत्र में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के एक अकाउंट की जानकारी छिपाई थी।
इससे पहले याचिकाकर्ता ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के डिप्टी जनरल मैनेजर को बतौर गवाह कोर्ट में पेश होने के आदेश दिए थे, लेकिन उन्होंने ‘थर्ड पार्टी इंफॉर्मेशन’ का हवाला देकर डेटा देने से मना कर दिया था। हालांकि, आरटीआई से मिली जानकारी में इस बैंक खाते के अस्तित्व से इनकार नहीं किया गया है।