
दरअसल, परिजनों ने आरोप लगाया है कि सीपत थाने में युवक के साथ बेरहमी से मारपीट की गई। उसे करीब 36 घंटे तक हिरासत में रखा गया। इसके बाद आबकारी एक्ट के मामले में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
वहीं, जेल पहुंचने के 3 दिन बाद युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मामले में न्याय की मांग को लेकर परिजनों ने पहले हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
जानिए क्या है पूरा मामला ?
जानकारी के मुताबिक, ग्राम मोहरा निवासी श्रवण तांबे (35) खेती-किसानी करता था। पुलिस ने उसे 17 जनवरी 2024 को पकड़ा था। इसके बाद 18 जनवरी को पुलिस ने 6 लीटर महुआ शराब के साथ उसकी गिरफ्तारी का दावा किया।
पुलिस ने उसके खिलाफ आबकारी एक्ट के तहत केस दर्ज कर 19 जनवरी को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। अगले दिन 20 जनवरी को जब परिजन उससे मिलने जेल पहुंचे, तो उन्हें मिलने नहीं दिया गया।
जेल पहुंचने के बाद बिगड़ी तबीयत, तीसरे दिन मौत
इस दौरान 21 जनवरी को जेल में अचानक श्रवण की तबीयत बिगड़ गई। पहले जेल अस्पताल में उसका इलाज किया गया। इसके बाद हालत गंभीर होने पर उसे सिम्स अस्पताल रेफर किया गया, जहां 22 जनवरी को उसकी मौत हो गई।
जेल प्रबंधन के अनुसार, श्रवण को सांस लेने में दिक्कत होने पर पहले जेल अस्पताल और फिर सिम्स भेजा गया था। सिम्स पहुंचने के बाद देर रात उसकी मौत हो गई।
सिर में गंभीर चोट की वजह से मौत
मामले की न्यायिक जांच प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट निकसन डेविड लकड़ा ने की थी। उन्होंने 22 जुलाई 2024 को जांच रिपोर्ट पेश किया।
इसमें पोस्टमार्टम, एफएसएल, हिस्टोपैथोलॉजी रिपोर्ट और अन्य सबूतों के आधार पर श्रवण की मौत का कारण सिर में लगी गंभीर चोट और उससे उत्पन्न जटिलताओं को बताया गया था। न्यायिक जांच के दौरान मृतक के परिजनों और अन्य गवाहों के बयान भी दर्ज किए गए थे।
न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे परिजन
मृतक श्रवण तांबे की पत्नी लहरा बाई और बेटी ने मामले को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने न्यायिक जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई और हिरासत में मौत के लिए 50 लाख रुपए मुआवजे की मांग की थी।
अक्टूबर 2024 में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 1 लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया था। साथ ही पुलिसकर्मियों की लापरवाही को भी जिम्मेदार माना था। इसके बाद परिजनों ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की।