
पुलिस के अनुसार, आरोपी विनोद कुमार सांडिल्य और दीपक कुमार सांडिल्य ने ग्रामीण महिलाओं को खाद देने के नाम पर पॉश मशीन में उनके अंगूठे के निशान लिए। इसके बाद उनके नाम पर खाद वितरण संबंधी इलेक्ट्रॉनिक डेटा दर्ज किया गया। हालांकि, किसानों को मौके पर खाद का वितरण नहीं किया गया।
जांच में सामने आया कि ग्रामीण महिलाओं के नाम पर 2647 बोरी यूरिया और 570 बोरी डीएपी, यानी कुल 3217 बोरी खाद से संबंधित इलेक्ट्रॉनिक प्रविष्टियां की गई थीं। इस फर्जीवाड़े से किसानों को खाद का वास्तविक लाभ नहीं मिल सका।
पुलिस के मुताबिक, दर्ज प्रविष्टियों के आधार पर यूरिया की अनुमानित राशि 7,05,425.50 रुपए और डीएपी की राशि 7,69,500 रुपए है। इस तरह कुल 14,74,925.50 रुपए की आर्थिक क्षति सामने आई है।
शिकायत के बाद दर्ज हुई FIR
ग्रामीणों की शिकायत की जांच के बाद अनुविभागीय अधिकारी राजस्व राजपुर के माध्यम से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर थाना राजपुर में अपराध क्रमांक 177/2026 दर्ज किया गया। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धारा 318(4), 336(3) और 3(5) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
तीसरे आरोपी की भी सामने आई भूमिका
विवेचना के दौरान पुलिस को इस फर्जीवाड़े में विकास कुमार अग्रवाल की भी भूमिका मिली। इसके बाद पुलिस ने विनोद कुमार सांडिल्य (28), दीपक कुमार सांडिल्य (32), दोनों निवासी कुन्दीकला और विकास कुमार अग्रवाल (40), निवासी राजपुर को 13 अगस्त को गिरफ्तार किया।
तीनों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड पर भेजने की कार्रवाई की गई है। पुलिस मामले में खाद वितरण से जुड़े दस्तावेजों और अन्य तथ्यों की जांच कर रही है।