
इस मामले में पुलिस पहले विजय सेन को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश कर चुकी है। उससे पूछताछ और जांच के दौरान बिना पंजीयन नंबर वाले वाहन की खरीदी-बिक्री और दूसरे वाहन का नंबर इस्तेमाल करने में अन्य लोगों की भूमिका सामने आई। इसके बाद पुलिस ने फरार आरोपियों की तलाश शुरू की।
पुलिस की जांच में सामने आया कि बिना पंजीयन नंबर वाले वाहन की खरीदी-बिक्री के बाद उसे सड़क पर चलाने के लिए दूसरे वाहन का पंजीयन नंबर इस्तेमाल किया गया। इसी नंबर के कारण ट्रैफिक चालान और टोल से जुड़े मैसेज उस वाहन के वास्तविक मालिक के मोबाइल पर पहुंचने लगे।
यानी सड़क पर चल रहा वाहन कोई और था, लेकिन उसकी पहचान के लिए इस्तेमाल किया जा रहा पंजीयन नंबर दूसरे वाहन का था। इसी गड़बड़ी से पुलिस को मामले की जानकारी मिली और जांच आगे बढ़ी।
विजय सेन की गिरफ्तारी के बाद सामने आई दूसरे आरोपियों की भूमिका
पुलिस ने पहले विजय सेन को गिरफ्तार किया था। पूछताछ और जांच के दौरान पुलिस को मामले में शामिल अन्य लोगों के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद मोहन नगर थाना पुलिस ने फरार आरोपियों की तलाश शुरू की।
जांच में रोहित कुमार कंकरिया और अनूप रावलानी की भूमिका सामने आने के बाद पुलिस टीम ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। दोनों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की गई है।
वाहन और नंबर के इस्तेमाल की भी जांच जारी
पुलिस अब बिना पंजीयन वाले वाहन की खरीदी-बिक्री, उसके इस्तेमाल और दूसरे वाहन के पंजीयन नंबर के दुरुपयोग से जुड़े पूरे मामले की जांच कर रही है। मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका और वाहन के लेन-देन से जुड़े तथ्यों की भी जानकारी जुटाई जा रही है।