
ईडी के मुताबिक खरीफ विपणन वर्ष 2021-22 में कस्टम मिलिंग का प्रोत्साहन 40 रुपए से बढ़ाकर 120 रुपए प्रति क्विंटल किया गया था। एजेंसी की जांच के अनुसार, इस राशि की दो किस्तों में मिलर्स से 20-20 रुपए प्रति क्विंटल की कथित अवैध वसूली की गई। ईडी ने बताया है कि मिलर्स के बिलों का भुगतान रोककर कथित तौर पर वसूली के लिए दबाव बनाया जाता था।
ईडी की जांच में तत्कालीन मार्कफेड एमडी मनोज सोनी और छत्तीसगढ़ स्टेट राइस मिलर्स एसोसिएशन के तत्कालीन कोषाध्यक्ष रोशन चंद्राकर की भूमिका सामने आने का दावा किया गया है। एजेंसी के मुताबिक जिला राइस मिलर्स एसोसिएशन से कथित वसूली की जानकारी जिला विपणन अधिकारियों तक पहुंचती थी और भुगतान के लिए बिलों का मिलान किया जाता था।
ईडी ने 2024 में दोनों को गिरफ्तार किया था और बाद में मामले में अभियोजन शिकायत भी पेश की। विशेष अदालत ने इस पर संज्ञान लिया था। एजेंसी के अनुसार, प्रोत्साहन राशि बढ़ने के बाद कथित किकबैक से 100 करोड़ रुपए से अधिक की राशि जुटाई गई थी।
अब राज्य सरकार से मिले दस्तावेजों के जरिए ईडी यह जांच रही है कि 40 से 120 रुपए प्रति क्विंटल की वृद्धि का निर्णय किन परिस्थितियों में लिया गया और इसकी प्रक्रिया में कौन-कौन से अधिकारी व संस्थाएं शामिल थीं। मामले में आगे की जांच जारी है।