
नगर सेना और SDRF की टीम ने रातभर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर 160 से अधिक ग्रामीणों को सुरक्षित निकाला। इनमें बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। राहत की बात रही कि किसी तरह की जनहानि नहीं हुई।
25 सितंबर की रात 11:15 बजे परसदा में बाढ़ की सूचना मिली। इसके बाद SDRF दुर्ग की टीम मोटर बोट और जरूरी उपकरणों के साथ मौके पर पहुंची। रात करीब 12 बजे से सुबह 5 बजे तक चले पहले अभियान में 50 से 55 ग्रामीणों को सुरक्षित बाहर निकालकर राहत स्थल तक पहुंचाया गया।
इसके बाद सुबह 5:30 से 7:30 बजे तक दूसरे अभियान में 60 और नागरिकों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। रेस्क्यू किए गए लोगों में बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। प्रशासन के अनुसार कुल 160 से अधिक प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।
बैराजों से 20,090 क्यूसेक पानी छोड़ा गया
दुर्ग सिंचाई विभाग के ईई आशुतोष शारश्वत के मुताबिक, 26 सितंबर की सुबह 7 बजे तक राजनांदगांव के चार बैराजों से 20,090 क्यूसेक पानी शिवनाथ नदी में छोड़ा गया।
उन्होंने बताया कि पहले करीब 24 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था, जिसे अब कम किया गया है। इसके बावजूद लगातार जलभराव और नदी के बढ़े जलस्तर को देखते हुए आसपास के क्षेत्रों में सतर्कता बरती जा रही है।
महमरा एनीकट में 12 फीट ऊपर पानी
दुर्ग के महमरा एनीकट में फिलहाल पानी करीब 12 फीट ऊपर चल रहा है। वहीं बालोद जिले के तांदुला और खरखरा डैम भी ओवरफ्लो की स्थिति में हैं। तांदुला नदी के वेस्ट वियर से करीब 1,500 क्यूसेक और खरखरा से 300 क्यूसेक पानी शिवनाथ नदी में पहुंच रहा है। इससे नदी के आसपास के निचले इलाकों और गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।