
मैनपुर मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर और गरियाबंद जिला मुख्यालय से लगभग 85 किलोमीटर दूर घने जंगल और पहाड़ियों के बीच स्थित देवधारा जलप्रपात बारिश के दिनों में देखते ही बनता है। पहाड़ों के बीच से निकलती जलधारा करीब 60 से 70 फीट की ऊंचाई से चट्टानों पर गिरती है, तो आसपास का पूरा क्षेत्र पानी की फुहारों और कल-कल की आवाज से जीवंत हो उठता है। यही दृश्य यहां पहुंचने वाले सैलानियों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र है।
पहाड़, जंगल और जलधारा का अद्भुत संगम
देवधारा जलप्रपात उदंती क्षेत्र के घने वनांचल में स्थित है। दो पहाड़ियों के बीच इंद्रावन नदी पर स्थित यह प्राकृतिक स्थल अपने आसपास मौजूद पहाड़ी जलधाराओं और सरोवरों के कारण और भी खूबसूरत दिखाई देता है। स्थानीय स्तर पर भाई दाहरा, हाथ दाहरा, नागरशील सहित कई प्राकृतिक जलस्रोत और रमणीय स्थल भी यहां मौजूद हैं, जहां वर्षभर पानी रहने की बात स्थानीय लोग बताते हैं।
बारिश के मौसम में जब आसपास की पहाड़ियां हरियाली से ढक जाती हैं और जलधाराएं उफान पर होती हैं, तब देवधारा का प्राकृतिक सौंदर्य कई गुना बढ़ जाता है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में लोग यहां प्रकृति के बीच समय बिताने और जलप्रपात का मनोरम दृश्य देखने पहुंचते हैं।
पर्यटन विकास की अपार संभावनाएं
देवधारा जलप्रपात केवल प्राकृतिक सौंदर्य का स्थल ही नहीं, बल्कि क्षेत्र में ग्रामीण और स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देने की बड़ी संभावना भी रखता है। यदि यहां सुरक्षित पहुंच मार्ग, आवश्यक बुनियादी सुविधाएं, स्वच्छता, पार्किंग, सूचना संकेतक और पर्यटकों की सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाएं विकसित की जाएं, तो यह क्षेत्र एक महत्वपूर्ण पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है।
पर्यटन गतिविधियों के विस्तार से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और ग्रामीणों के लिए आय के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं। स्थानीय स्तर पर छोटे व्यवसाय, खान-पान, हस्तशिल्प और अन्य सेवाओं को भी इससे बढ़ावा मिलने की संभावना है।
पूर्व कलेक्टर ने भी पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का दिया था आश्वासन
स्थानीय लोगों के अनुसार तत्कालीन कलेक्टर निरंजन दास ने कुछ वर्ष पूर्व देवधारा क्षेत्र का दौरा किया था। उस दौरान उन्होंने इस प्राकृतिक स्थल को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने का आश्वासन क्षेत्रवासियों को दिया था। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि अभी तक देवधारा को अपेक्षित रूप से विकसित करने की दिशा में ठोस पहल दिखाई नहीं दी है।
पहुंच मार्ग अभी भी चुनौती
देवधारा जलप्रपात तक पहुंचने के लिए देवभोग-रायपुर मुख्य मार्ग से डुमरपड़ाव के पास से जांगड़ा और पायलीखंड होते हुए पहुंचा जा सकता है। वहीं मैनपुर से कुल्हाड़ीघाट और बेसराझर की ओर से भी यहां पहुंचने का रास्ता है। वन विभाग द्वारा जलप्रपात तक पहुंचने के लिए कच्ची सड़क का निर्माण कराया गया है, लेकिन बारिश के मौसम में मार्ग की स्थिति पर्यटकों के लिए चुनौती बन जाती है।
प्राकृतिक धरोहर को संरक्षण के साथ मिले पर्यटन का स्वरूप
देवधारा की सबसे बड़ी खूबसूरती इसकी प्राकृतिक और वनांचलीय पहचान है। ऐसे में पर्यटन विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों की सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखना जरूरी होगा। उदंती क्षेत्र वनभैंसा सहित विभिन्न वन्यजीवों के लिए जाना जाता है। इसलिए यहां पर्यटन सुविधाओं का विकास प्रकृति और वन्यजीवों के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए किया जाना आवश्यक है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि देवधारा को यदि योजनाबद्ध तरीके से विकसित किया जाए तो यह मैनपुर और गरियाबंद जिले के पर्यटन मानचित्र पर अपनी अलग पहचान बना सकता है। फिलहाल बारिश के मौसम में यहां पहुंचने वाले पर्यटक जलप्रपात की खूबसूरती को अपने कैमरों में कैद कर रहे हैं और प्रकृति के इस अनुपम नजारे को देखकर वापस लौट रहे हैं।