
आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष गिरधारी नायक ने बताया कि शिकायतकर्ता को समझाया गया कि रावण मानव नहीं था, इसलिए यह मामला मानव अधिकार आयोग के दायरे में नहीं आता। उन्होंने कहा कि आयोग के सामने ऐसे कई फर्जी मामले आते हैं, जिनकी संख्या 3 से 4 हजार है।
गिरधारी नायक ने बताया कि साल 2000 से 2026 तक आयोग के सामने करीब 74 हजार मामले आए हैं। इनमें करीब 900 मामले अभी पेंडिंग हैं, जबकि कुल मामलें में 40 से 45 प्रतिशत मामले सामाजिक बहिष्कार से जुड़े हैं।
आयोग ने यह भी बताया कि रायपुर के 6 हजार सफाई कर्मचारियों में 1800 की समस्याएं सामने आई हैं। अच्छे ड्राइवरों को सम्मान देने, बार-बार एक्सीडेंट करने वालों का लाइसेंस सस्पेंड करने और स्कूलों की जर्जर हालत को देखते हुए स्कूल डिजाइन में बदलाव के सुझाव दिए गए।
2000 से 2026 तक 74 हजार मामले आए
दरअसल, सोमवार को छत्तीसगढ़ मानव अधिकार आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष गिरधारी नायक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आयोग के कामकाज और सामने आए मामलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि साल 2000 से 2026 तक आयोग के सामने करीब 74 हजार मामले आए हैं।
इनमें से करीब 900 मामले अभी पेंडिंग हैं। इनमें ज्यादातर पिछले एक-दो साल के मामले हैं। इनके जल्द निराकरण के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
40-45% मामले सामाजिक बहिष्कार से जुड़े
आयोग के अनुसार, कुल मामलें में करीब 40 से 45 प्रतिशत मामले सामाजिक बहिष्कार से जुड़े हैं। इनमें से करीब 1 प्रतिशत मामलों में ही कार्रवाई की स्थिति बनती है। ऐसे मामलों में जरूरत के अनुसार प्रतिबंधात्मक कार्रवाई, समझाइश या अपराध दर्ज करने की कार्रवाई की गई है।
अच्छे ड्राइवरों को सम्मान, बार-बार हादसे पर लाइसेंस सस्पेंड का सुझाव
सड़क हादसों को रोकने के लिए आयोग ने आरटीओ और ट्रैफिक विभाग से भी चर्चा की है। आयोग ने सुझाव दिया है कि तीन से अधिक दुर्घटनाएं करने वाले ड्राइवरों के लाइसेंस की समीक्षा कर निलंबन जैसी कार्रवाई की जाए।
वहीं, लंबे समय तक बिना दुर्घटना के सुरक्षित तरीके से वाहन चलाने वाले ड्राइवरों को सम्मानित और प्रोत्साहित करने का सुझाव दिया गया है। आयोग का मानना है कि अच्छे काम करने वालों को प्रोत्साहन देने से सुरक्षित ड्राइविंग को बढ़ावा मिलेगा।