
आदेश 29 सितंबर 2026 को पारित किया गया है इस वजह से कब्जाधारी को 10 नवंबर तक दुकान खाली करना होगा। फूल चौक से आगे जीई रोड पर वक्फ की यह संपत्ति दो मंजिला दुकान जिसका क्षेत्रफल 500 वर्गफीट है।
इसकी कीमत करोड़ों में है। रिकॉर्ड के मुताबिक इसे मध्यप्रदेश राजपत्र में 25 अगस्त 1989 के क्रमांक 114 तथा औकाफ पंजी के सरल क्रमांक 11/114 में सुन्नी हन्फी मस्जिद नयापारा ट्रस्ट के नाम वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज किया गया है। नयापारा मस्जिद ट्रस्ट का आरोप है कि अब्दुल मतीन सिद्दीकी ने बिना वैध किरायानामा निष्पादित किए दुकान पर कब्जा कर रखा है।
इसके बाद वक्फ बोर्ड में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू हुई और 4 मार्च 2020 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। दस्तावेज के अनुसार वक्फ बोर्ड के तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने 7 अगस्त 2020 को दुकान खाली कराने का आदेश दिया था। इसके बाद मामला हाई कोर्ट भी गया था।
1978 के बाद वैध किरायानामा नहीं कराया गया था
किरायेदार अब्दुल मतीन का कहना है कि उन्होंने 1 फरवरी 1978 को राशि जमा कर दुकान किराए पर दी गई थी और किराया 175 रुपए प्रतिमाह था। 1978 के किरायानामे के आधार पर लंबे समय से किरायेदार होने का दावा किया। वहीं ट्रस्ट की ओर से कहा गया कि 1978 के बाद वैध किरायानामा नहीं कराया गया और वर्तमान में दुकान पर कब्जा अतिक्रमण की श्रेणी में आता है।
वक्फ संपत्ति पट्टा नियम 2014 के तहत दुकान का वर्तमान बाजार मूल्यांकन कर 30 हजार रुपए मासिक किराया निर्धारित करने का प्रस्ताव दिया गया था। लेकिन उन्होंने स्वीकार नहीं किया। वे 3 हजार रुपए प्रतिमाह किराया देना चाहते थे।