15 साल से पुलिया की आस में पीपलखुंटा के ग्रामीण, अब सब्र टूटा—आंदोलन की चेतावनी

Chhattisgarh Crimesयुमेन्द्र कश्यप/मैनपुर। विकासखंड मैनपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत धनोरा के आश्रित एवं ओडिशा सीमावर्ती ग्राम पीपलखुंटा के ग्रामीण पिछले करीब 15 वर्षों से नाले पर स्थायी पुलिया निर्माण की मांग कर रहे हैं। लंबे समय से मांग के बावजूद अब तक पुलिया का निर्माण नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से जल्द स्थायी समाधान की मांग करते हुए मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।

ग्रामीणों के अनुसार, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत पीपलखुंटा गांव तक पक्की सड़क तो पहुंच गई, लेकिन रास्ते में पड़ने वाले नाले पर स्थायी पुल का निर्माण नहीं हो सका। पूर्व में नाले पर रपटा बनाया गया था, जो करीब 15 वर्ष पहले तेज बारिश और बाढ़ के दौरान बह गया। इसके बाद से ग्रामीणों को हर साल बरसात के मौसम में आवागमन की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ता है।

बताया जा रहा है कि पीपलखुंटा एवं आसपास के पारा-टोला के करीब 700 ग्रामीण बारिश के दिनों में आवागमन की समस्या से प्रभावित होते हैं। नाले में पानी का जलस्तर बढ़ने के बाद गांव का संपर्क अमलीपदर सहित आसपास के क्षेत्रों से बाधित हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूली बच्चों को भी कई बार उफनते नाले को पार कर स्कूल जाना पड़ता है, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

15 वर्षों से आवेदन-निवेदन, नहीं हुआ स्थायी समाधान

ग्रामीणों ने बताया कि पुल निर्माण की मांग को लेकर कई बार शासन-प्रशासन एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों को आवेदन और मौखिक रूप से जानकारी दी गई। इसके बावजूद अब तक स्थायी पुल निर्माण की दिशा में अपेक्षित पहल नहीं होने से ग्रामीणों में आक्रोश है।

ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दौरान वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर बनाई जाने वाली पुलिया भी पानी के तेज बहाव में बह जाती है। ऐसे में हर वर्ष ग्रामीणों को उसी समस्या का सामना करना पड़ता है।

समय-सीमा में पहल नहीं हुई तो चक्काजाम की चेतावनी

ग्रामीणों ने कहा कि एक बार फिर शासन-प्रशासन को पुल निर्माण की मांग से अवगत कराया जाएगा। यदि निर्धारित समय-सीमा में पुल निर्माण के लिए ठोस पहल नहीं की गई तो ग्रामीण आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होंगे। ग्रामीणों ने राष्ट्रीय राजमार्ग-130 पर अनिश्चितकालीन चक्काजाम करने की चेतावनी दी है। ग्रामीणों ने कहा कि आंदोलन की स्थिति निर्मित होने पर इसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

पंचायत प्रतिनिधि बोले—कई बार उठाई जा चुकी है मांग

ग्राम पंचायत धनोरा के पूर्व उपसरपंच एवं वर्तमान सरपंच प्रतिनिधि सिरधर मरकाम ने बताया कि पूर्व में उनके उपसरपंच कार्यकाल के दौरान पंचायत मद से वैकल्पिक पुलिया का निर्माण कराया गया था। वर्तमान में भी ग्राम पंचायत स्तर पर वैकल्पिक व्यवस्था की जाती है, लेकिन बरसात में तेज बहाव के कारण यह व्यवस्था टिक नहीं पाती।

उन्होंने कहा कि स्थायी पुल निर्माण के लिए कई बार शासन-प्रशासन के समक्ष मांग रखी जा चुकी है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी समस्या से अवगत कराया गया है, लेकिन अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।

सिरधर मरकाम के अनुसार, ग्राम सभा में ग्रामीणों ने एकमत होकर निर्णय लिया है कि पहले एक बार फिर शासन-प्रशासन के समक्ष पुल निर्माण की मांग रखी जाएगी। यदि समय-सीमा के भीतर उचित पहल नहीं होती है तो ग्रामीण आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

इस मौके पर रतन सिंह नागेश, नीलांबर मांझी, पविलो नागवंशी, दुर्जन नागवंशी, नित्य नागवंशी, मनीराम नागवंशी, बरनोराम मरकाम, निर्मम मरकाम, केशव मांझी, अर्जन सोरी, कार्तिक राम मरकाम, गोवर्धन मांझी, टीकम मरकाम, सिरधर मरकाम, जयलाल कोटवार, श्रीनाथ नागेश, ओमकार मरकाम, उदेराम नागेश, सोबनाथ, गन्तूराम, मिलाप विश्वकर्मा पंच, तम्बर मरकाम, सिकधर नेताम, मोहन नागवंशी, नूरपति बाई मरकाम सरपंच, जानकी नागेश पंच, पूर्णिमा धुर्वा, ममता नागेश पंच, कुशल मांझी पंच, हरिसिंह पंच, रामेश्वर मांझी, नकुल नागेश, बेदराम नागेश, खिरसिंह नागेश सहित ग्राम पीपलखुंटा के सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित रहे।

Exit mobile version