गरियाबंद जिले के देवभोग स्थित पंडित श्यामशंकर मिश्र महाविद्यालय में मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने प्रदर्शन किया

Chhattisgarh Crimesगरियाबंद जिले के देवभोग स्थित पंडित श्यामशंकर मिश्र महाविद्यालय में मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने प्रदर्शन किया। करीब 700 छात्रों वाले कॉलेज में गंदे यूरिनल, पीने के पानी की समस्या, प्रोफेसरों की कमी और किताबें उपलब्ध नहीं होने जैसे मुद्दे उठाए गए।

एबीवीपी के जिला संयोजक क्षितिज नारायण तिवारी के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने कॉलेज का घेराव किया। छात्र प्राचार्य कार्यालय के सामने धरने पर बैठ गए और समस्याओं के स्थायी समाधान की मांग की।

छात्रों का कहना है कि, कॉलेज के यूरिनल से बदबू आती है। पानी की टंकी खुली है और आरओ मशीन खराब पड़ी है। पीजी सेक्टर में पर्याप्त प्रोफेसर नहीं हैं। विद्यार्थियों ने कक्षाओं में टेबल-कुर्सियों की कमी और खराब पंखों की मरम्मत नहीं होने का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि इन समस्याओं से पढ़ाई और कॉलेज में मिलने वाली सुविधाएं प्रभावित हो रही हैं।

जनभागीदारी शुल्क के खर्च पर सवाल

छात्रों ने बताया कि हर छात्रों से जनभागीदारी मद में 750 रुपए लिए जाते हैं। इसके बावजूद कॉलेज में जरूरी सुविधाओं की कमी बनी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि लाखों रुपए खर्च नहीं किए जा रहे हैं और खर्च की प्रक्रिया की जांच होनी चाहिए।

छात्र नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि गोहरापदर कॉलेज के प्राचार्य को पिछले चार साल से इस कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य की जिम्मेदारी दी गई है। उनके मुताबिक, प्रभारी प्राचार्य महीने में केवल दो बार आते हैं। छात्रों ने कॉलेज में होने वाले खर्च और व्यवस्थाओं की जांच की मांग की है।

चार साल से एक ही प्रकाशक से किताबें खरीदने का आरोप

विद्यार्थियों ने किताबों की खरीदी को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि कॉलेज में पिछले चार साल से एक ही प्रकाशक से किताबें खरीदी जा रही हैं, जबकि उनके अनुसार उस प्रकाशक की किताबें पूरे पाठ्यक्रम को कवर नहीं करतीं। छात्रों ने जरूरत के मुताबिक दूसरे प्रकाशकों से भी किताबें खरीदने की मांग की।

विद्यार्थियों के मुताबिक, यूजी और पीजी के चौथे, पांचवें और छठे सेमेस्टर की किताबें उपलब्ध नहीं हैं। कॉलेज में मौजूद प्राध्यापक नमूना पुस्तकों और अपने स्तर पर पाठ्यक्रम की व्यवस्था कर कक्षाएं संचालित कर रहे हैं। इससे छात्रों को निजी अध्ययन के लिए जरूरी किताबें नहीं मिल पा रही हैं।

छात्रों ने कॉलेज का जेम (GeM) पोर्टल पर पंजीयन नहीं होने का मुद्दा भी उठाया और खरीदी प्रक्रिया की जांच की मांग की। हालांकि, आर्थिक अनियमितता के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

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