
पंडाल में श्रीलंका की मां शंकरी देवी, नेपाल की मां गुह्येश्वरी, बांग्लादेश की मां जेसोरेश्वरी, तेलंगाना की मां जोगुलम्बा, तिब्बत की मां मानसा और पाकिस्तान की मां हिंगलाज देवी की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। हर शक्तिपीठ के ऊपर उसके नाम, स्थान और महत्व की जानकारी दी गई है।
पंडाल के आखिरी हिस्से में ब्रह्मांड की थीम पर सजावट की गई है। यहां मां जगदंबा की प्रतिमा खास आकर्षण है। श्रद्धालुओं का कहना है कि एक ही जगह सात देवियों के दर्शन होने से समय और पैसे की बचत हो रही है। पंडाल की चर्चा सोशल मीडिया पर भी हो रही है।
35 साल से मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर रही समिति
बालवीर दुर्गा उत्सव समिति के सदस्यों ने बताया कि समिति पिछले 35 वर्षों से नवरात्र में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर रही है। हर साल कुछ नया और विशेष करने की कोशिश की जाती है। पिछले साल छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों की आराध्य देवियों की झांकी प्रस्तुत की गई थी। इस बार सात शक्तिपीठों को एक साथ प्रदर्शित करने का फैसला लिया गया।।
एक साल तक की तैयारी के बाद तैयार हुई झांकी
समिति के सदस्यों के मुताबिक, सात शक्तिपीठों की झांकी तैयार करने के लिए करीब एक साल तक तैयारी की गई। अलग-अलग शक्तिपीठों से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं और उनके महत्व को समझने के बाद झांकी का स्वरूप तय किया गया।
समिति का उद्देश्य है कि श्रद्धालु एक ही पंडाल में सातों देवियों के दर्शन कर सकें। साथ ही उन्हें शक्तिपीठों के धार्मिक महत्व की जानकारी भी मिले। धमतरी का यह पंडाल नवरात्र में धार्मिक आस्था और रचनात्मकता का संगम बना हुआ है