हाथियों के पदचिह्नों से वन पुनर्जीवन तकः उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व की अभिनव “एलीफेंट रेस्टोरेंट” एवं “हॉर्नबिल रेस्टोरेंट” पहल

पूरन मेश्राम/गरियाबंद।वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक और अभिनव पहल करते हुए उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) ने अपने एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) आधारित हाथी ट्रैकिंग कार्यक्रम को पारिस्थितिक पुनर्स्थापन (Ecological Restoration) के एक अनूठे अभियान में परिवर्तित किया है। इस पहल के अंतर्गत हाथियों के गोबर को प्राकृतिक बीज भंडार (Natural Seed Bank) के रूप में उपयोग कर वनों में प्राकृतिक रूप से पौधों का संवर्धन किया जा रहा है।यह अभिनव पहल छत्तीसगढ़ राज्य वन्यजीव बोर्ड के सदस्य गौरव निहलानी के सहयोग एवं सुझाव से प्रारंभ की गई है,जो यह दर्शाती है कि आधुनिक तकनीक, स्थानीय समुदाय एवं प्रकृति मिलकर किस प्रकार जैव विविधता को सुदृढ़ करते हुए मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम कर सकते हैं।
हाथियों की निगरानी से वन पुनर्जीवन तक
Chhattisgarh Crimesउदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में 40 से अधिक जंगली हाथियों की सतत निगरानी हेतु स्थानीय ग्रामीणों को एलीफेंट ट्रैकर्स के रूप में नियुक्त किया गया है। ये ट्रैकर्स सीजी एलीफेंट ट्रैकिंग एवं अलर्ट ऐप के माध्यम से हाथियों की वास्तविक समय (Real-time) की लोकेशन दर्ज करते हैं, जिससे आसपास के ग्रामीणों को समय पर चेतावनी मिलती है तथा मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है।लगभग 2,500 फीट से अधिक ऊँचाई वाले दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में कार्यरत ये एलीफेंट ट्रैकर्स अब वन संरक्षण में एक और महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।हाथियों के पारंपरिक आवागमन मार्गों (Elephant Corridors) पर पड़े ताजे गोबर का संग्रह कर उनमें प्राकृतिक रूप से अंकुरित हो रहे पौधों को सुरक्षित निकाला जा रहा है। चूँकि हाथी विभिन्न प्रकार के फलों का सेवन करते हैं, इसलिए उनके गोबर में उपस्थित बीज प्राकृतिक रूप से अंकुरण के लिए उपयुक्त अवस्था में होते हैं।मैदानी निरीक्षण के दौरान हाथियों के गोबर से निम्नलिखित प्रजातियों के पौधे स्वाभाविक रूप से उगते हुए पाए गए- आम, कुम्ही,करमेटा इन प्राकृतिक रूप से अंकुरित पौधों को सुरक्षित स्थानों पर प्रतिरोपित कर “एलीफेंट रेस्टोरेंट” विकसित किए जा रहे हैं, जहाँ भविष्य में हाथियों को उनकी पसंद का प्राकृतिक भोजन उपलब्ध हो सकेगा।

हॉर्नबिल रेस्टोरेंट की स्थापना

इसी प्रकार हॉर्नबिल पक्षियों के लिए भी भोजन उपलब्ध कराने हेतु स्थानीय हार्नबिल ट्रैकर्स द्वारा विगत 3 माह से निम्नलिखित फलदार प्रजातियों के बीज एकत्रित किए जा रहे हैं –
केरमेट्टा, पाकड़, पीपल, बरगद, जंगली जामुन इन बीजों को तैयार कर उपयुक्त वन क्षेत्रों में लगाया जा रहा है, जिससे “हॉर्नबिल रेस्टोरेंट” विकसित किए जा सकें। इससे न केवल हॉर्नबिल बल्कि अनेक अन्य फलभक्षी पक्षियों एवं वन्यजीवों को भी वर्षभर प्राकृतिक भोजन उपलब्ध होगा।एआई आधारित आंकड़ों से पारिस्थितिक पुनर्स्थापन पौधारोपण के लिए स्थानों का चयन किसी अनुमान के आधार पर नहीं किया जा रहा है।सीजी एलीफेंट ट्रैकिंग एवं अलर्ट ऐप से प्राप्त हाथियों के आवागमन संबंधी आंकड़ों तथा हॉर्नबिल ट्रैकर्स द्वारा संकलित सूचनाओं के आधार पर उन क्षेत्रों की पहचान की जा रही है, जहाँ वन पुनर्स्थापन का सर्वाधिक सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।यह वैज्ञानिक एवं डेटा-आधारित दृष्टिकोण सुनिश्चित करता है कि वन्यजीवों के लिए भोजन संसाधन उन्हीं क्षेत्रों में विकसित किए जाएँ जहाँ उनकी वास्तविक आवश्यकता है।

प्राकृतिक तरीके से मानव-हाथी संघर्ष में कमी
इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य मानव-हाथी संघर्ष को प्राकृतिक तरीके से कम करना है।जब जंगल के भीतर हाथियों की पसंद के पर्याप्त भोजन स्रोत उपलब्ध होंगे, तब हाथियों को कृषि क्षेत्रों एवं मैदानी गाँवों की ओर आने की आवश्यकता कम होगी।
दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में कार्यरत एलीफेंट ट्रैकर्स इस प्रकार केवल हाथियों की निगरानी ही नहीं कर रहे हैं, बल्कि जंगलों में पर्याप्त भोजन उपलब्ध कराकर हाथियों को उनके प्राकृतिक आवास में ही व्यस्त रखने का कार्य भी कर रहे हैं, जिससे मैदानी क्षेत्रों के ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित हो रही है।

सामुदायिक सहभागिता आधारित संरक्षण मॉडल
यह पहल इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण है कि स्थानीय समुदाय वन्यजीव संरक्षण के सक्रिय भागीदार बन सकते हैं।जो ग्रामीण कभी हाथियों की आवाजाही से प्रभावित होते थे, वही आज एलीफेंट ट्रैकर्स जैव विविधता संरक्षक बीज संग्राहक
आवास पुनर्स्थापनकर्ता

मानव-हाथी संघर्ष न्यूनीकरण सहयोगी के रूप में कार्य कर रहे हैं।
उनका पारंपरिक ज्ञान और एआई आधारित निगरानी प्रणाली मिलकर सामुदायिक संरक्षण का एक अभिनव मॉडल प्रस्तुत कर रहे हैं।

जलवायु-अनुकूल एवं आत्मनिर्भर वन पारिस्थितिकी की दिशा में एक कदम

हाथियों को “वनों का माली (Gardeners of the Forest)” कहा जाता है क्योंकि वे लंबी दूरी तक बीजों का प्रसार कर प्राकृतिक रूप से वनों के पुनर्जनन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

हाथियों के गोबर से प्राप्त पौधों का उपयोग कर तथा हाथियों एवं हॉर्नबिल के लिए भोजनयुक्त वन क्षेत्रों का विकास कर उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व वनों की पारिस्थितिकीय संपर्कता (Ecological Connectivity), वन्यजीव आवास, जैव विविधता तथा दीर्घकालीन जलवायु सहनशीलता (Climate Resilience) को सुदृढ़ कर रहा है।

यह पहल तकनीक, विज्ञान, स्थानीय समुदाय एवं पारिस्थितिक पुनर्स्थापन के समन्वित उपयोग के माध्यम से स्वस्थ एवं आत्मनिर्भर वन पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की दिशा में उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

हाथियों की भोजन पसंद को समझने में एआई की महत्वपूर्ण भूमिका
मानव-हाथी संघर्ष की रोकथाम हेतु विकसित सीजी एलीफेंट ट्रैकिंग एवं अलर्ट ऐप अब हाथियों की पारिस्थितिकी एवं भोजन व्यवहार (Feeding Behaviour) को समझने का भी एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक माध्यम बन चुका है।

एलीफेंट ट्रैकर्स द्वारा प्रत्येक हाथी की गतिविधि के साथ उसके भोजन संबंधी व्यवहार का भी रिकॉर्ड ऐप में दर्ज किया जाता है। इन हजारों फील्ड रिकॉर्डों के विश्लेषण से यह स्पष्ट हुआ है कि छत्तीसगढ़ के हाथी अनेक देशज वनस्पतियों को प्राथमिकता देते हैं। सामान्य धारणा के विपरीत हाथी केवल महुआ पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि वे तेंदू की पत्तियाँ एवं जड़ें, बाँस की कोपलें, साल तथा अन्य अनेक देशज वनस्पतियों का भी व्यापक रूप से सेवन करते हैं। यह जानकारी वन प्रबंधन एवं मानव-हाथी संघर्ष न्यूनीकरण के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रही है।माध्यम बन चुका है।

एलीफेंट ट्रैकर्स द्वारा प्रत्येक हाथी की गतिविधि के साथ उसके भोजन संबंधी व्यवहार का भी रिकॉर्ड ऐप में दर्ज किया जाता है। इन हजारों फील्ड रिकॉर्डों के विश्लेषण से यह स्पष्ट हुआ है कि छत्तीसगढ़ के हाथी अनेक देशज वनस्पतियों को प्राथमिकता देते हैं। सामान्य धारणा के विपरीत हाथी केवल महुआ पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि वे तेंदू की पत्तियाँ एवं जड़ें, बाँस की कोपलें, साल तथा अन्य अनेक देशज वनस्पतियों का भी व्यापक रूप से सेवन करते हैं। यह जानकारी वन प्रबंधन एवं मानव-हाथी संघर्ष न्यूनीकरण के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रही है।

कुल्हाड़ीघाट परिक्षेत्र में संचालित वर्तमान पहल ने इन एआई आधारित निष्कर्षों की प्राकृतिक पुष्टि भी की है। हाथियों के गोबर से आम, कुम्ही एवं केरमेट्टा के पौधों का स्वाभाविक रूप से अंकुरित होना यह प्रमाणित करता है कि ये प्रजातियाँ हाथियों के प्रमुख भोजन स्रोत हैं तथा हाथी बीजों के दीर्घ दूरी तक प्रसार में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इसी एआई आधारित भोजन संबंधी आंकड़ों एवं हाथियों के गोबर से प्राप्त वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में “एलीफेंट रेस्टोरेंट” विकसित किए जा रहे हैं। यह पहल भारत में संभवतः पहली ऐसी पहल है, जहाँ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), वास्तविक फील्ड डेटा तथा प्राकृतिक बीज प्रसार को एकीकृत कर वैज्ञानिक आधार पर हाथियों के आवास का समृद्धिकरण एवं मानव-हाथी संघर्ष न्यूनीकरण किया जा रहा है।

संदेश

“एलीफेंट रेस्टोरेंट” वैज्ञानिक एवं प्रमाण-आधारित आवास प्रबंधन का परिणाम हैं, न कि केवल फलदार वृक्षों का सामान्य पौधारोपण।

“प्रत्येक हाथी अपने पीछे केवल पदचिह्न ही नहीं छोड़ता, बल्कि आने वाले कल के वनों के बीज भी छोड़ जाता है। एआई आधारित ट्रैकिंग और प्रकृति की स्वाभाविक पुनर्जनन क्षमता के समन्वय से उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व हाथियों के गलियारों को पारिस्थितिक पुनर्जीवन के गलियारों में परिवर्तित कर रहा है।

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