
चीफ जस्टिस ने कहा कि शपथ पत्र के कई हिस्सों में एक जैसी बातें बार-बार लिखी गई हैं। इसे देखकर ऐसा लगता है कि यह AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि दस्तावेज देखने में बहुत साफ-सुथरा और व्यवस्थित है, लेकिन इससे जमीनी सच्चाई नहीं बदल जाती।
कोर्ट ने कहा कि अगर अस्पताल में सब कुछ ठीक होता, तो मामला हाईकोर्ट तक पहुंचता ही नहीं। सरकार और विभाग को असली स्थिति बतानी चाहिए, न कि कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश करनी चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि जरूरतमंद को इलाज मिलेगा, तो उसकी दुआ मिलेगी।
सुनवाई के दौरान कोर्ट कमिश्नर ने भी पहले शपथ पत्र AI से तैयार किए जाने की आशंका जताई थी।
कोर्ट कमिश्नर ने बताया छत से टपक रहा था पानी, फायर सिस्टम भी बंद
सुनवाई के दौरान कोर्ट में मार्च और अप्रैल में किए गए निरीक्षण की रिपोर्ट का भी जिक्र किया गया। कोर्ट कमिश्नरों ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि CIMS में पानी के रिसाव की गंभीर समस्या है। दो दिन पहले ही अस्पताल के कई हिस्सों में पानी भर गया था।
इसके अलावा फायर फाइटिंग सिस्टम भी लंबे समय से बंद पड़ा था। इस पर शासन ने बताया कि 15 जून 2026 को फायर फाइटिंग सिस्टम की मरम्मत के लिए आदेश जारी कर काम शुरू करा दिया गया है। फिलहाल मरम्मत का काम तेजी से चल रहा है।
31 नई मशीनें खरीदी जा रहीं, 13 अस्पताल पहुंचीं
CGMSC ने भी मामले में हाईकोर्ट में शपथ पत्र पेश किया। इसमें चार्ट के जरिए CIMS के लिए खरीदी जा रही जरूरी मशीनों और उपकरणों की स्टेटस रिपोर्ट दी गई। शपथ पत्र के अनुसार, CIMS के लिए कुल 31 अत्याधुनिक मशीनों की खरीदी की प्रक्रिया चल रही है।
इनमें से 13 मशीनें अस्पताल पहुंच चुकी हैं। दो मशीनों के लिए जून में ही परचेज ऑर्डर जारी कर दिए गए हैं। वहीं, दो मशीनों की कीमत अधिक होने के कारण CIMS से मंजूरी ली गई है। मंजूरी मिलने के बाद एक-दो दिन में इनके लिए भी ऑर्डर जारी कर दिया जाएगा।
इसके अलावा दो मशीनें अभी तकनीकी परीक्षण (टेक्निकल डेमो) के दौर में हैं। परीक्षण पूरा होने के बाद उनकी फाइनेंशियल बिड खोली जाएगी। दो मशीनों का टेंडर जून में खुला था, जिसका मूल्यांकन जारी है। वहीं, छह मशीनों की बिड 9 जुलाई को खोली जाएगी।
हाईकोर्ट बोला- जरूरतमंद को इलाज मिले तो दुआ देगा
हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने कहा कि इस मामले का उद्देश्य किसी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करना नहीं, बल्कि CIMS की व्यवस्था में सुधार लाना है। कोर्ट ने कहा कि कोर्ट कमिश्नर जब चाहें अस्पताल जाकर सरकारी दावों का सत्यापन कर सकते हैं।
हाईकोर्ट ने कहा कि केवल कागजों में दावे करने से काम नहीं चलेगा। जब अस्पताल आने वाले जरूरतमंद मरीज को समय पर मशीनों की सुविधा और बेहतर इलाज मिलेगा, तभी वह दिल से दुआ देगा।