
अपर सत्र न्यायाधीश, चतुर्थ एफटीएससी और विशेष न्यायालय (पॉक्सो) दुर्ग के पीठासीन अधिकारी अनिष दुबे ने यह फैसला सुनाया। शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक रूपवर्षा दिल्लीवार ने पैरवी की। कोर्ट में पेश रिकॉर्ड के अनुसार, पीड़िता और आरोपी की पहचान इंस्टाग्राम पर हुई थी।
बातचीत के दौरान आरोपी ने शादी का झांसा देकर नाबालिग को अपने साथ चलने के लिए तैयार किया। 17 जुलाई 2025 को आरोपी ने पीड़िता को पावर हाउस रेलवे स्टेशन बुलाया। वहां से वह उसे रायपुर होते हुए ट्रेन से प्रयागराज और फिर नोएडा ले गया।
अभियोजन के अनुसार, आरोपी पीड़िता को नोएडा के फेस-1 थाना क्षेत्र स्थित बागवानी मार्केट के एक किराए के कमरे में ले गया। वहां 17 जुलाई से 23 जुलाई 2025 के बीच उसने कई बार दुष्कर्म किया। 19 जुलाई 2025 को पीड़िता की मां ने वैशाली नगर थाना में बेटी की गुमशुदगी दर्ज कराई।
पुलिस ने मोबाइल लोकेशन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की मदद से जांच की और 23 जुलाई 2025 को नोएडा से पीड़िता को बरामद कर लिया। सुनवाई के दौरान जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेज कोर्ट में पेश किए गए।
इनके आधार पर अदालत ने माना कि घटना के समय पीड़िता की उम्र 15 वर्ष 5 माह 22 दिन थी। इसलिए कानून के अनुसार उसकी सहमति मान्य नहीं थी।
पीड़िता के बयान को माना भरोसेमंद
अदालत ने कहा कि पीड़िता का बयान, बरामदगी, दस्तावेज और अन्य साक्ष्य भरोसेमंद हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल फोरेंसिक रिपोर्ट में कुछ चीजें नहीं मिलने से अपराध खत्म नहीं माना जा सकता, यदि अन्य साक्ष्य पर्याप्त हों।
कोर्ट ने जताई चिंता
फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा कि बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराध बेहद गंभीर हैं और समाज के लिए चिंता का विषय हैं। हालांकि आरोपी की उम्र 22 वर्ष होने के कारण उसे कानून में तय न्यूनतम कठोर सजा दी गई।
20 साल की सजा और मुआवजा
कोर्ट ने आरोपी को पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत 20 वर्ष के सश्रम कारावास और 1,000 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 87 के तहत 3 वर्ष के सश्रम कारावास और 500 रुपये अर्थदंड की सजा भी दी गई।