8,526 नक्सलियों का सरेंडर, 455 को नौकरी…अमित शाह ने बताया बस्तर का पूरा हिसाब, बोले-पीड़ा दूर करना भी सरकार की जिम्मेदारी

Chhattisgarh Crimesयुमेन्द्र कश्यप/छत्तीसगढ़ क्राइम्स। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा है कि नक्सलवाद खत्म करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पिछले पांच दशकों में इससे प्रभावित लोगों की पीड़ा दूर करना और उनके जीवन में सम्मान बहाल करना भी सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि बस्तर में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने और आदिवासी समुदायों के पुनर्वास के लिए केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ सरकार को पूरा सहयोग देगी।

शाह ने बृहस्पतिवार को नक्सलवाद प्रभावित लोगों की सहायता के लिए आयोजित कार्यक्रम को डिजिटल माध्यम से संबोधित किया। उन्होंने कहा कि नक्सल हिंसा का सबसे ज्यादा असर गरीब आदिवासी समुदायों पर पड़ा है। अब प्रभावित लोगों को सहायता देने के साथ क्षेत्र में विकास और सामान्य जनजीवन बहाल करने पर ध्यान दिया जा रहा है।

*● 8,526 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण:*

अमित शाह के मुताबिक, करीब 8,526 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। लगभग 7,500 ऐसे लोगों के बैंक खाते खुलवाए गए, जिनके पास खाते नहीं थे। इसके अलावा 1,625 लोगों को इनाम की राशि और 7,882 लोगों को प्रोत्साहन राशि दी गई है। वहीं, 455 लोगों को रोजगार मिला और 129 लोगों को जमीन आवंटित की गई।

*● दिव्यांगों को दिए जा रहे सहायक उपकरण:*

शाह ने बताया कि 5 से 7 अक्टूबर तक जगदलपुर में आयोजित दिव्यांग सहायता कार्यक्रम से 3,600 से अधिक लोग लाभान्वित हुए। इनमें करीब 1,570 लोग बस्तर के थे। इस पहल के तहत जरूरतमंदों को कृत्रिम अंग, व्हीलचेयर, तिपहिया साइकिल, सुनने में मदद करने वाले उपकरण और छड़ियां उपलब्ध कराई जा रही हैं।

*● सुरक्षा शिविरों में मिलेंगी विकास से जुड़ी सुविधाएं:*

गृह मंत्री ने कहा कि सुरक्षा शिविरों को सेवा केंद्रों और सामुदायिक केंद्रों में बदला जाएगा। इन केंद्रों के जरिए स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और विकास से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने का प्रयास होगा। उन्होंने कहा कि जिन स्थानों पर पहले सुरक्षाकर्मी लोगों की रक्षा के लिए तैनात रहते थे, वहीं अब केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारी विकसित बस्तर की नींव रखेंगे। इन केंद्रों से बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य, युवाओं के रोजगार तथा आदिवासी समुदायों की आर्थिक जरूरतों पर ध्यान दिया जाएगा।

*● बस्तर ओलंपिक और आदिवासी संस्कृति को बढ़ावा:*

अमित शाह ने बस्तर ओलंपिक, बस्तर पंडुम और नियद नेल्लानार योजना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन पहलों के जरिए आदिवासी संस्कृति को पुनर्जीवित करने, बुनियादी ढांचे में सुधार करने और हिंसा प्रभावित इलाकों में सामान्य जनजीवन बहाल करने का प्रयास किया जा रहा है।
शाह के अनुसार, बस्तर ओलंपिक ने उन क्षेत्रों में भी लोगों को खेलों के लिए एकजुट किया है, जहां पहले गोलियों की आवाज और बम विस्फोटों के कारण भय का माहौल रहता था। सरकार का जोर अब नक्सलवाद से प्रभावित लोगों के पुनर्वास के साथ बस्तर में स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और विकास की सुविधाएं पहुंचाने पर है।

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