छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने बिलासपुर के मिशन अस्पताल कैंपस की लीज रिन्युअल विवाद की अपील खारिज कर दी

Chhattisgarh Crimesछत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने बिलासपुर के मिशन अस्पताल कैंपस की लीज रिन्युअल विवाद की अपील खारिज कर दी है। हाईकोर्ट ने कहा कि लीज का नवीनीकरण कोई पक्का या ऑटोमैटिक अधिकार नहीं है। यह केवल तब संभव है जब किरायेदार मूल शर्तों का पूरी तरह पालन करे।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद मिशन अस्पताल में बुलडोजर की कार्रवाई शुरू हो गई है। सुबह 7 बजे नगर निगम का अतिक्रमण दस्ता अस्पताल परिसर पहुंचा, जहां अवैध निर्माण पर तोड़फोड़ की गई। इस दौरान अतिक्रमणकारियों और निगम अधिकारियों के बीच विवाद हो गया।

दरअसल, क्रिश्चियन वीमेंस बोर्ड ऑफ मिशन के डायरेक्टर नितिन लॉरेंस और उनके सहयोगियों ने मिशन अस्पताल की जमीन की लीज बढ़ाने के लिए आवेदन पेश किया था,। जिसे नजूल अधिकारी ने खारिज कर दिया। दोबारा लीज न बढ़ाने के प्रशासन के फैसले के खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने उनकी तर्कों को खारिज करते हुए जिला प्रशासन के फैसले को सही ठहराया था।

सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ डिवीजन बेंच में अपील

सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में अपील की थी। इसमें तर्क दिया कि बिलासपुर के चांटापारा स्थित प्लॉट नंबर 20 और 21 उन्हें 1959 की भूमि राजस्व संहिता की धारा 158(3) के तहत दिया गया था। वे सालों से धार्मिक, शैक्षिक और धर्मार्थ कार्य कर रहे हैं।

उन्होंने 1882 से संचालित अपने मिशन का इतिहास, अस्पताल, नर्सिंग स्कूल और चैपल का विवरण देते हुए कहा कि सरकार ने उन्हें बेदखल करने की कोशिश की है, जबकि वे लगातार सेवा कार्य कर रहे हैं। लेकिन हाईकोर्ट ने तर्क नामंजूर करते हुए अपील खारिज कर दी।

27 साल तक नहीं की लीज रिन्युअल की मांग

हाईकोर्ट ने कहा कि, न केवल रिन्युअल की मांग 27 साल तक नहीं की गई, बल्कि इस दौरान लगातार शर्तें तोड़ी गईं। नोटिस को भी किसी अन्य फोरम में चुनौती नहीं दी गई। ऐसे में न तो इनके पास कोई वैध टाइटल है, न ही ओरिजिनल अलॉटी का प्रतिनिधित्व करने का अधिकार।

लीज की शर्तों का उल्लंघन, नोटिस भी नहीं चुनौती

दूसरी ओर रिकॉर्ड में सामने आया कि, 16 अगस्त 2024 को बिलासपुर नजूल तहसीलदार ने अवैध निर्माण हटाने और गलत गतिविधियां बंद करने का नोटिस जारी किया था। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन से जुड़े एक व्यक्ति ने स्वेच्छा से जमीन का बड़ा हिस्सा सरकार को सौंप भी दिया। सरकार ने इसे विधिसम्मत तरीके से वापस ले लिया है और कब्जा अब भी सरकार के पास है।

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