
ग्रामीण नारायण वर्मा के अनुसार, लगभग 20-25 साल पहले जब बोटेपार और खजरी एक ही पंचायत थे, तब इस पर गिट्टी-मुरूम डलवाया गया था, लेकिन उसके बाद से कोई स्थायी निर्माण कार्य नहीं हुआ है। समय के साथ यह रास्ता पूरी तरह जर्जर हो गया है।
ग्रामीण चंद्रशेखर वर्मा के मुताबिक, यह मुरूम गिट्टी वाला रास्ता था। कभी सड़क बनी ही नहीं। बारिश में तो कोई जा ही नहीं सकता। इस रास्ते में हम किसान भाई बहुत त्रस्त है।
ग्रामीण बोले- सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे बने
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे बन चुके हैं, जिससे रोजाना दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। बरसात के दिनों में स्थिति और भी खराब हो जाती है, जब गड्ढों में पानी भर जाने से सड़क का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है।
ग्रामीण सुशीला बाई ने बताया कि इसी सड़क पर फिसलने से उनका पैर टूट गया था, जिसके कारण उन्हें दो महीने तक बिस्तर पर रहना पड़ा। इस सड़क की बदहाली का सबसे अधिक असर किसानों पर पड़ रहा है। बोटेपार के किसान अपनी धान की फसल बेचने के लिए लगभग 6 किलोमीटर दूर पटेवा सोसाइटी जाते हैं।
खराब सड़क के कारण ट्रैक्टर ले जाना जोखिम भरा होता है, इसलिए उन्हें घुमका होकर लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। इससे उनके समय, ईंधन और मेहनत का नुकसान होता है।