छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में महाराष्ट्र से आए एक बीमार गिद्ध का सफल रेस्क्यू कर इलाज किया गया

Chhattisgarh Crimesछत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में महाराष्ट्र से आए एक बीमार गिद्ध का सफल रेस्क्यू कर इलाज किया गया है। यह गिद्ध महाराष्ट्र के ताडोबा अंधारी टाइगर रिजर्व से लगभग 400 किलोमीटर दूर उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व पहुंचा था।

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि गिद्ध की पीठ पर माइक्रो ट्रांसमीटर और जीपीएस लगा हुआ था। डीएफओ ने पुष्टि की कि यह एक व्हाइट-रम्प्ड वल्चर (White-rumped Vulture) है, जिसने ताडोबा अंधारी टाइगर रिजर्व से उड़ान भरी थी।

गिद्ध को इंदागांव (बफर) परिक्षेत्र के काण्डसर बीट में पेट्रोलिंग के दौरान बीमार अवस्था में पाया गया। पेट्रोलिंग श्रमिक राधेश्याम यादव ने तत्काल परिक्षेत्र अधिकारी सुशील कुमार सागर को इसकी सूचना दी।अधिकारी मौके पर पहुंचे और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।

प्रारंभिक जांच में गिद्ध डी-हाइड्रेशन या किसी बीमारी के कारण उड़ नहीं पा रहा था और गर्दन झुकाकर बैठा हुआ था।

टेलिफोनिक कॉन्फ्रेंस के जरिए रेस्क्यू

उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व के डीएफओ वरुण जैन के अनुसार, बिलासपुर के गिद्ध विशेषज्ञ अभिजीत शर्मा ने टेलिफोनिक कॉन्फ्रेंस के माध्यम से रेस्क्यू टीम को मार्गदर्शन दिया। टीम ने गिद्ध को पानी और कृत्रिम आहार उपलब्ध कराया।

रायपुर के जंगल सफारी लाया जा रहा

गिद्ध को घने जंगल से सुरक्षित निकालकर बीट गार्ड रामकृष्ण साहू की मदद से गरियाबंद पहुंचाया गया। वहां जंगल सफारी के डॉक्टर जडिया और ऋचा ने गिद्ध को रेस्क्यू केज में स्थानांतरित किया। अब उसे नया रायपुर स्थित जंगल सफारी ले जाया जा रहा है, जहां उसका आगे का उपचार होगा। उपचार के बाद गिद्ध को उसके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित छोड़ा जाएगा।

टाइगर रिजर्व का 70% क्षेत्र पहाड़ी वन

उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व का 70 प्रतिशत क्षेत्र पहाड़ी वन है, जहां ओढ़-आमामोरा की पहाड़ियों में पहले भी गिद्धों की उपस्थिति दर्ज की गई है। इस रेस्क्यू ऑपरेशन में इंदागांव परिक्षेत्र की टीम और जंगल सफारी की टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

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