
जहां एक ओर पूरा देश राष्ट्रीय पर्व मना रहा था, वहीं मानवीय सेवा और राष्ट्रीय मूल्यों का प्रतीक मानी जाने वाली रेडक्रॉस सोसायटी का सूरजपुर कार्यालय पूरे दिन सूना पड़ा रहा। इस दौरान न झंडारोहण हुआ, न राष्ट्रगान गाया गया और न ही कोई जिम्मेदार पदाधिकारी मौके पर मौजूद था।
रेडक्रॉस सोसायटी के सदस्य नाराज
इस बड़ी चूक को लेकर रेडक्रॉस सोसायटी के कई सदस्यों ने गहरी नाराजगी व्यक्त की है। सदस्यों का कहना है कि संस्था का मूल उद्देश्य सेवा और राष्ट्र के प्रति सम्मान रहा है, लेकिन वर्तमान में यह संस्था सेवा केंद्र की बजाय ‘राजनीति का अड्डा’ बनकर रह गई है।
सदस्यों का आरोप- पदाधिकारी केवल पद और रसूख तक सीमित
नाराज सदस्यों ने आरोप लगाया कि पदाधिकारी केवल पद और रसूख तक सीमित रह गए हैं। राष्ट्रीय पर्वों को भी नजरअंदाज किया जाना इस बात का संकेत है कि संस्था अपने मूल सिद्धांतों से भटक गई है।