
वहीं, महापौर परिषद ने निगम आयुक्त को 48 घंटे के भीतर पद से हटाने या निलंबित करने की मांग की है। जबकि आयुक्त मोनिका वर्मा का कहना है कि सब नियम से ही हो रहा है, ऐसा नहीं है कि शिकायत सही है या गंभीर है।
यह शिकायत 22 जनवरी 2026 को महानदी भवन, नवा रायपुर में नगरीय प्रशासन और विकास विभाग के मुख्य सचिव के नाम से दी गई। सचिव से मिलने वालों में महापौर शशि सिन्हा के साथ एमआईसी सदस्य जाहिर अब्बास, अनिल देशमुख, संजू नेताम, रोहित धनकर, ममता यादव, जमुना ठाकुर और रंजिता बेनुआ शामिल रहे।
बजट नहीं होने के बावजूद खर्च का आरोप
पहले आवेदन में परिषद ने आरोप लगाया कि निगम आयुक्त ने छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम की धारा 97 के तहत 30 नवंबर तक बजट अनुमान प्रस्तुत नहीं किया। परिषद का कहना है कि बिना स्वीकृत बजट के 1 दिसंबर से किया गया समस्त खर्च अवैध और शून्य है। परिषद ने इसे वित्तीय कदाचार बताते हुए आयुक्त को 48 घंटे के भीतर पद से हटाने या निलंबित करने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी गई कि कार्रवाई नहीं होने पर मामला हाईकोर्ट और राज्यपाल तक ले जाया जाएगा।
जल शोधन संयंत्र में 3 साल से केमिकल हाउस बंद
दूसरे आवेदन में मोरिद जलाशय स्थित 6 एमएलडी जल शोधन संयंत्र को लेकर सवाल उठाए गए हैं। परिषद का आरोप है कि पिछले तीन सालों से केमिकल हाउस जली हुई स्थिति में है और आधुनिक PLC/SCADA सिस्टम भी बंद पड़ा है।
इसके बावजूद मैन्युअल डोजिंग से पानी की सप्लाई की जा रही है, जिसे जनस्वास्थ्य के लिए खतरा बताया गया है। परिषद ने दोषी अधिकारियों को निलंबित करने, बर्खास्त करने और पूरे मामले की जांच आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) से कराने की मांग की है।
प्रभारी स्वास्थ्य अधिकारी को कार्यभार नहीं सौंपने का आरोप
तीसरे आवेदन में परिषद ने कहा कि शासन नियुक्त प्रभारी स्वास्थ्य अधिकारी को कार्यभार नहीं सौंपा गया। इसके बजाय एक स्वच्छता पर्यवेक्षक को नियमों के खिलाफ प्रभारी स्वास्थ्य अधिकारी और सलाहकार समिति का सचिव बना दिया गया। परिषद ने इसे धारा 46, 54 और 419 का उल्लंघन बताते हुए तत्काल सुधार की मांग की है।
टेंडर नियमों में बदलाव पर आपत्ति
चौथे आवेदन में परिषद ने आरोप लगाया कि मेयर-इन-कौंसिल की स्वीकृति के बिना टेंडर नियमों में बदलाव किया गया। परिषद के अनुसार टेंडर क्रमांक 184068 दिनांक 1 जनवरी 2026 में शर्त क्रमांक 7 और 8 में बिना पूर्व अनुमति संशोधन किया गया, जो नियमों के खिलाफ है।
परिषद ने इसे पारदर्शिता और समान अवसर के विपरीत बताते हुए संशोधन निरस्त करने की मांग की है।
प्रभारी महापौर ने आंदोलन की चेतावनी दी
प्रभारी महापौर और जल-सामान्य प्रशासन विभाग के चेयरमैन अनिल देशमुख ने कहा कि मोरिद जलाशय से 8 से 10 हजार लोग प्रभावित होते हैं। केमिकल हाउस ढाई साल से बंद है और मैन्युअल डोजिंग से पानी की सप्लाई हो रही है।