
ऐसी स्थिति में पेड़ों की कटाई या सफाई करना संभव नहीं है। सभी आरोपियों ने अवैध कब्जे के आरोपों को पूरी तरह अस्वीकार किया। डिजिटल सबूत से कार्रवाई का दावा
उपनिदेशक वरुण जैन ने बताया कि कार्रवाई डिजिटल सबूतों के आधार पर की गई है। सैटेलाइट इमेजरी से यह सामने आया कि 2005 के बाद 2010 से 2022 के बीच बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई हुई। 2011 तक 45 हेक्टेयर क्षेत्र में कटाई हुई थी, जो अगले दस सालों में बढ़कर 106 हेक्टेयर हो गई।
टीम ने मौके पर पेड़ों के ठूंठ और जले अवशेषों का पंचनामा तैयार कर सबूत जुटाए हैं। मामले में वाइल्डलाइफ एक्ट के तहत केस किया गया है। उपनिदेशक ने कहा कि सभी साक्ष्य न्यायालय में पेश होंगे, जहां अंतिम निर्णय लिया जाएगा। 2008 के बाद हुए कब्जों का खुलासा
उदंती-सीतानदी अभयारण्य में 2008 के बाद हुए अवैध कब्जों का खुलासा 2022 से शुरू हुआ, जब वरुण जैन ने उपनिदेशक के रूप में पदभार संभाला। आईटी एक्सपर्ट वरुण जैन ने 2023 में गूगल अर्थ की मदद से अभयारण्य का रिमोट सेंसिंग पोर्टल तैयार किया। इस पोर्टल में 20 साल से अधिक पुराने सैटेलाइट इमेज हैं।
सैटेलाइट इमेज से खुली अवैध कटाई और कब्जे की परतें
2006, 2008 और 2010 में ली गई सैटेलाइट तस्वीरों के अध्ययन से अवैध पेड़ कटाई और अतिक्रमण के मामलों का लगातार खुलासा होता गया।