
4 से 5 बच्चे एक लकड़ी के ठेले को खींच रहे हैं,एक बच्चा उस पर बैठा है। पहिया जाम हो रहा है तो कोई रस्सी से खींच रहा है,लेकिन चेहरे पर मुस्कान है।बच्चे बोले हमारे पास साइकिल नहीं है गाड़ी नहीं है, इसलिए हमने खुद अपनी गाड़ी बना ली।
यह दृश्य एक ओर जहांँ बच्चों के वैज्ञानिक सोच और जुगाड़ टेक्नोलॉजी को दिखाता है।वहीं दूसरी ओर प्रशासन की उदासीनता की पोल भी खोलता है। अगर इन बच्चों को सही प्लेटफॉर्म,शिक्षा और सड़क की सुविधा मिले तो ये बड़े आविष्कारक बन सकते हैं।ग्रामीणों ने प्रशासन से मौहानाला तक पक्की सड़क, पुल पुलिया और खंडहर स्कूल भवन मरम्मत की माँग किया है।