
बताया जा रहा है कि मार्च-अप्रैल 2026 जिले में टोंडेमरका जंगल से करीब 15 लाख और मरकाकोनारी से करीब पांच लाख रुपये बरामद किए गए थे। आरोप है कि उक्त रकम को सरकारी खाते में जमा कराने की जगह तत्कालीन दो डीएसपी ने आपस में बांट लिया।
बाद में दोनों डीएसपी का स्थानांतरण कोरबा और दंतेवाड़ा जिले में हो गया है। इनके स्थानांतरण के बाद मामले का राजफाश हुआ। आत्मसमर्पित माओवादियों से पूछताछ में यह बात सामने आई है।
सूत्रों के अनुसार, क्षेत्र में पदस्थापना के दौरान उक्त दोनों डीएसपी का कार्यकाल विवादित रहा है। जुलाई 2025 में कोकवार गांव के पूर्व सरपंच रमेश मंडावी ने लिखित शिकायत की थी कि उक्त दोनों डीएसपी ने उन्हें माओवादियों से जुड़े मामले में फंसाने की धमकी देकर ढाई लाख रुपये मांगे थे।
जांच में एक गंभीर जानकारी भी निकलकर आई कि माओवादी हिंसा के दौर में भी दोनों डीएसपी पुलिसकर्मियों को लिए बिना अकेले ही जंगल में चले जाते थे। नियमतः पुलिस अधिकारी को बीडीएस और पुलिस टीम के साथ गश्त करना होता है। बताया जा रहा है कि एसपी द्वारा कराई गई जांच में इन बिंदुओं को भी सम्मिलित किया गया था।