बस्तर में छलका बाढ़ पीड़ितों का दर्द, मुआवजे की मांग को लेकर प्रदर्शन, जगदलपुर चक्काजाम की चेतावनी

Chhattisgarh Crimesयुमेन्द्र कश्यप/छत्तीसगढ़ क्राइम्स। बाढ़ ने छत्तीसगढ़ के कई जिलों में इस बार जमकर तबाही मचाई. बस्तर में सबसे ज्यादा नुकसान बाढ़ से हुआ। किसानों की खड़ी फसल खेतों में डूब गई. घर से लेकर दुकान तक पानी में समा गए। लगातार बांधों से छोड़ा गया पानी नदियों के जलस्तर को बढ़ाता रहा, जिससे बाढ़ कई दिनों तक बना रहा। बाढ़ ने जहां किसानों की आर्थिक रुप से कमर तोड़ दी, वहीं मकान में रखा गया अनाज भी भीगकर खराब हो गया। किसान दाने-दाने को मोहताज हो गया।

बाढ़ पीड़ित किसान अब सरकार मदद और मुआवजे की मांग को लेकर सड़कों पर उतर गए हैं। बस्तर जिला मुख्यालय में आज किसानों ने जोरदार प्रदर्शन किसान कांग्रेस के बैनर तले किया। किसानों ने बस्तर कलेक्ट्रेट का घेराव कर वहां नारेबाजी की। किसानों की मांग थी कि सरकार मुआवजे का सर्वे कर उनको आर्थिक मदद जल्द से जल्द दे। बस्तर कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन करने आए किसानों के साथ उनके परिवारवाले भी मौजूद थे। किसानों ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर दस दिनों के भीतर उनको आर्थिक मदद नहीं दी जाती है, तो जगदलपुर में ट्रैक्टर से चक्काजाम करने को बाध्य होंगे।

कांग्रेस जिला अध्यक्ष सुशील मौर्य का कहना है कि छत्तीसगढ़ सरकार किसानों के साथ खानापूर्ति कर रही है। बाढ़ प्रभावित किसानों को 65 हजार देना पड़ेगा। खेती के लिए किसानों द्वारा लिए गए केसीसी लोन को माफ करना होगा। मकान नुकसान में कच्चे मकान को 3 लाख, पक्के मकान को 5 लाख और आंशिक मकान को 1 लाख रुपये देना होगा। बाढ़ में बहे मवेशी के लिए 60 हजार देना होगा।

किसानों को उनके नुकसान का उचित मुआवजा मिलना चाहिए. बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक में लाखों रुपए खर्च किए गए। अब बाढ़ पीड़ितों को भी मदद मिलनी चाहिए: सुशील मौर्य, जिला अध्यक्ष कांग्रेस

राजस्व अमले के द्वारा किए गए बाढ़ सर्वे से अभी तक मकान क्षति का करीब 30 करोड़ रुपये मुआवजा राशि प्रदान किया गया है। फसल क्षति का आकलन चल रहा हैव जिसमें 50 लाख मुआवजा प्रभावितों के खाते में चला गया है। किसानों के ज्ञापन को सरकार तक पहुंचाया जाएगा: सीपी बघेल, अपर कलेक्टर बस्तर

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