फिंगेश्वर का शाही दशहरा आज, रथयात्रा और शस्त्र प्रदर्शन, होंगे ये कार्यक्रम

Chhattisgarh Crimesयुमेन्द्र कश्यप/गरियाबंद। फिंगेश्वर। दशहरा आते ही रावण दहन की तस्वीर सामने आती है, लेकिन फिंगेश्वर में इस पर्व को मनाने का अंदाज बिल्कुल अलग है। यहां रावण दहन के बजाय शाही रथयात्रा, पारंपरिक अस्त्र-शस्त्रों के प्रदर्शन और राजपरिवार से जुड़ी सदियों पुरानी रस्मों के साथ दशहरा मनाया जाता है। आश्विन शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी यानी तेरस को होने वाला यह आयोजन धार्मिक आस्था, राजपरंपरा और लोकसंस्कृति का अनूठा संगम है। यही परंपरा फिंगेश्वर को दशहरा उत्सव की अलग पहचान देती है। आज यहां दशहरा का आयोजन होगा।

■ राजमहल से निकलेगी शाही रथयात्रा

शाही दशहरे की शुरुआत परंपरागत पूजा-अर्चना के साथ होगी। विभिन्न मंदिरों में विधि-विधान से पूजा के बाद पूर्व राजपरिवार के सदस्य नीलेंद्र बहादुर सिंह की अगुवाई में राजमहल परिसर से शाही रथयात्रा निकाली जाएगी। नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरती हुई यह यात्रा हाईस्कूल खेल मैदान पहुंचेगी, जहां धार्मिक अनुष्ठान और पारंपरिक कार्यक्रम होंगे। इस दौरान नगरवासी भी उत्सव में शामिल होकर परंपरा के साक्षी बनेंगे।

■ अस्त्र-शस्त्र प्रदर्शन में दिखेगी वीरता की झलक

फिंगेश्वर के शाही दशहरे की खासियत पारंपरिक अस्त्र-शस्त्रों का प्रदर्शन है। इसमें क्षेत्र की वीरता और पुरानी शौर्य परंपरा की झलक देखने को मिलती है। जहां देश के कई हिस्सों में दशहरा रावण दहन के साथ मनाया जाता है, वहीं फिंगेश्वर में राजपरिवार की ऐतिहासिक परंपराओं को जीवंत रखने पर जोर दिया जाता है। पीढ़ियों से चली आ रही इन रस्मों के माध्यम से नई पीढ़ी को क्षेत्र के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से परिचित होने का अवसर मिलता है।

■ मावली माता मंदिर समेत प्रमुख स्थलों पर आयोजन

शाही दशहरे के अवसर पर मावली माता मंदिर सहित प्रमुख धार्मिक स्थलों पर कार्यक्रम होंगे। राजमहल के फूलवारी परिसर में पवन चंद्राकर लोककला मंच की प्रस्तुति सहित अन्य सांस्कृतिक आयोजन आकर्षण का केंद्र रहेंगे। इन कार्यक्रमों में स्थानीय लोककला, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिलेगी।

■ पान-सुपारी भेंट करने की निभाई जाएगी रस्म

शाही रथयात्रा की राजमहल में वापसी के बाद पान-सुपारी भेंट करने की पारंपरिक रस्म निभाई जाएगी। यह रस्म राजपरिवार और नगरवासियों के बीच आत्मीय संबंधों का प्रतीक मानी जाती है। राजपरिवार की सहभागिता के साथ मनाया जाने वाला यह उत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि फिंगेश्वर की ऐतिहासिक पहचान और सामाजिक एकजुटता का भी प्रतीक है।

Exit mobile version