
कोर्ट ने नियमित भर्ती की समय-सीमा न बताने पर नाराजगी जाहिर करते हुए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के सचिव को 24 मार्च से पहले नया शपथपत्र पेश करने के निर्देश दिए हैं। इसमें यह बताना होगा कि मेंटल अस्पताल में नई भर्ती कब तक पूरी होगी।
दरअसल, बिलासपुर के सकरी स्थित मेंटल अस्पताल की अव्यवस्था को लेकर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई जारी है। डिवीजन बेंच ने एडवोकेट ऋषि राहुल सोनी को कोर्ट कमिश्नर नियुक्त कर अस्पताल का निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। उन्होंने अस्पताल का निरीक्षण कर मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं सहित अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
कोर्ट में क्या शिकायतें सामने आईं
पूर्व सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट को बताया गया था कि अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर और स्टाफ की कमी है। साथ ही साफ-सफाई और गंदगी पर भी पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इस पर कोर्ट ने स्वास्थ्य सचिव से शपथपत्र मांगा था, जिसमें अव्यवस्था दूर करने के लिए किए जा रहे उपायों की जानकारी देने को कहा गया था।
शासन का जवाब- सुविधाएं मुहैया कराने संविदा नियुक्ति
मामले में राज्य सरकार की ओर से बताया कि मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं बाधित न हों, इसलिए अंतरिम व्यवस्था के तहत 2 जनवरी 2026 के आदेश से दो एमडी (मनोचिकित्सा) चिकित्सकों की संविदा नियुक्ति दो सालों के लिए राज्य मानसिक चिकित्सालय, सेंदरी में की गई है। दोनों चिकित्सकों ने 13 जनवरी 2026 को कार्यभार ग्रहण कर लिया है और वर्तमान में सेवाएं दे रहे हैं।
शपथपत्र में यह भी बताया गया कि पैथोलॉजी विशेषज्ञ की भर्ती प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और चयन सूची जारी की जा चुकी है। वहीं, क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट और काउंसलर (सोशल वर्कर) पदों की भर्ती प्रक्रिया लोक सेवा आयोग में जारी है। वार्ड बॉय और वार्ड आया पदों की भर्ती व्यापम ने पूरी कर ली है। दस्तावेज सत्यापन के बाद नियुक्ति आदेश जारी किए जाएंगे।
भर्ती प्रक्रिया पर कोर्ट असंतुष्ट
मामले में न्यायमित्र ने कोर्ट को बताया कि स्वास्थ्य सचिव के शपथपत्र में मनोचिकित्सक पदों की नई भर्ती प्रक्रिया, समय-सीमा, आवेदन आमंत्रण, साक्षात्कार की संभावित तिथि, भर्ती में आ रही व्यावहारिक समस्याएं और उनके समाधान का स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है।
भर्ती परीक्षा स्थगित करनी पड़ी
वहीं, स्वास्थ्य सचिव के शपथपत्र में यह भी बताया गया कि मनोचिकित्सकों की भर्ती के लिए 22 अप्रैल 2025 को छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग से विज्ञापन जारी किया गया था। हालांकि दस्तावेज सत्यापन के दौरान सभी अभ्यर्थी या तो अनुपस्थित मिले या अयोग्य पाए गए। इसी कारण किसी भी अभ्यर्थी को साक्षात्कार के लिए शॉर्टलिस्ट नहीं किया जा सका और भर्ती प्रक्रिया स्थगित करनी पड़ी।