
शिकायत में बताया गया है कि 13 जुलाई 2023 को भर्ती विज्ञापन जारी हुआ था। लगभग दो साल बाद 16 सितंबर 2025 को उसे निरस्त कर दिया गया। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद इतना लंबा समय बीतना और फिर अचानक निरस्तीकरण और प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि विज्ञापन निरस्त करने वाली समिति की कार्यप्रणाली, निर्णय प्रक्रिया, सदस्यों की भूमिका की भी जांच हो।
5 मार्च 2019 को जारी विज्ञापन में 42 बैकलॉग पद निकाले गए थे। इनमें से केवल 7 पदों पर नियुक्ति हुई। 35 पद अब भी रिक्त बताए जा रहे हैं। नियमों के अनुसार पहले बैकलॉग पद भरना अनिवार्य होता है।
आरोप है कि बाकी पद खाली रहते हुए 11 फरवरी 2026 को नए पदों के लिए ताजा विज्ञापन जारी कर दिया गया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यह कदम आरक्षण रोस्टर क्रम का उल्लंघन हो सकता है।
रोस्टर निर्धारण पर गंभीर सवाल
शिकायत में कहा गया है कि विभागवार सीट निर्धारण, आरक्षण वर्गीकरण पूरी समिति की औपचारिक बैठक में तय नहीं हुआ। रोस्टर समिति में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, महिला प्रतिनिधित्व का पूरा ध्यान नहीं रखा गया।
यह आशंका जताई गई है कि इससे आरक्षित वर्गों के पद प्रभावित हो सकते हैं।
एक इकाई होते हुए अलग-अलग रोस्टर लागू
पशुधन फार्म परिसर और पशु चिकित्सा नैदानिक परिसर प्रशासनिक रूप से एक इकाई के रूप में कार्य करते हैं। आरोप है कि पदों के विज्ञापन में रोस्टर अलग-अलग लागू किया गया। इसे नियम विरुद्ध बताया गया है।
साथ ही रोस्टर रजिस्टर, 100 बिंदु या 200 बिंदु रोस्टर के पालन की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई है।
आयु सीमा पार होने के बावजूद जिम्मेदारी?
विश्वविद्यालय सेवा विनियम 2013 के अनुसार प्रशासनिक पदों के लिए सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष निर्धारित है। शिकायत में सवाल उठाया गया है कि यदि रोस्टर समिति के अध्यक्ष इस आयु सीमा के बाद भी पद पर कार्यरत हैं तो उसकी वैधता की जांच हो।
भर्ती प्रक्रिया पर रोक की मांग
शिकायतकर्ताओं ने वर्तमान भर्ती प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। साथ ही रोस्टर रजिस्टर, समिति कार्यवाही, विज्ञापन निरस्तीकरण से जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक करने की बात कही है।
उनका कहना है कि पहले शेष बैकलॉग पद नियमानुसार भरे जाएं। उसके बाद ही नए पदों पर भर्ती शुरू हो।