
इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हल्की झूमाझटकी भी हुई, लेकिन किसी के घायल होने की खबर नहीं है।
इससे पहले प्रदर्शनकारी नवा रायपुर के तूता धरना स्थल पर इकट्ठा हुए थे। इस प्रदर्शन में अलग-अलग जिलों से लोग शामिल हुए। हालांकि पुलिस ने इन्हें रोकने के लिए कड़ी सुरक्षा के इंतजाम किए थे, धरनास्थल के चारों तरफ बैरिकेडिंग की गई थी।
मसीही समाज का कहना है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने का यह प्रयास है, जिसमें समाज के सभी वर्गों के लोगों ने भागीदारी दी है। फिलहाल धरनास्थल में मसीही समाज के नेता इस विधेयक से होने वाले नुकसान को लेकर विरोध कर रहे हैं।
पिछले सप्ताह शहर में निकाली थी रैली
रायपुर में नए धर्मांतरण कानून के विरोध में पिछले सप्ताह संयुक्त मसीही समाज ने रैली निकाली। यह रैली बुढ़ातालाब से अंबेडकर चौक तक निकाली गई। रैली में शामिल समाज के प्रतिनिधियों का कहना था कि कानून में पहले जिन बिंदुओं पर आपत्ति जताई गई थी, उन्हें दोबारा शामिल कर दिया गया है।
मसीही समाज के नेताओं का कहना है कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और संविधान सभी नागरिकों को अपने धर्म का पालन और प्रचार करने की स्वतंत्रता देता है। उन्होंने विशेष रूप से “लालच” शब्द की स्पष्ट परिभाषा की मांग उठाई और कहा कि स्वेच्छा से धर्म अपनाने या प्रचार करने पर किसी प्रकार की रोक नहीं लगाई जानी चाहिए।
समाज के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि अगर इस कानून में सुधार नहीं किया गया, तो वे न्यायालय का रुख करेंगे। साथ ही उन्होंने राज्यभर में मशाल रैली और विरोध प्रदर्शन जारी रखने की बात कही, जिससे सरकार तक उनकी आवाज पहुंच सके।
जानिए विधेयक में क्या है ?
दरअसल, इस विधेयक में अवैध तरीके से धर्मांतरण कराने के मामलों में दोषी पाए जाने पर 7 से 10 साल तक की जेल और कम से कम 5 लाख रुपए जुर्माना लगाया जाएगा।
अगर पीड़ित नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग से हो, तो सजा बढ़ाकर 10 से 20 साल तक की जेल और न्यूनतम 10 लाख जुर्माना देना होगा। वहीं, सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में 10 साल से लेकर आजीवन कारावास होगी। कम से कम 25 लाख रुपए जुर्माना लगेगा।
गृहमंत्री विजय शर्मा की ओर से पेश किया गया यह नया विधेयक साल 1968 के पुराने कानून की जगह लेगा, जिसे सरकार ने वर्तमान तकनीक और सामाजिक परिस्थितियों के लिहाज से नाकाफी माना है। इस विधेयक को अंतिम रूप देने के लिए गृहमंत्री और डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने 50 से ज्यादा मैराथन बैठकें की थी।
सरकार के अनुसार इस बिल का मकसद बल, प्रलोभन, धोखाधड़ी या गलत जानकारी देकर कराए जाने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाना है। सदन में बिल पास होते ही BJP विधायकों ने जय श्री राम के नारे लगाए।
वहीं विपक्ष ने इस बिल का विरोध किया और वॉकआउट कर दिया था। विपक्ष का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के रिटायर्ड जजों के साथ-साथ सभी दलों के विधायकों की राय ली जानी चाहिए। सदन में यह बिल ध्वनि मत से पास हो गया।