
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की परत हाथ या पैर से मसलने पर ही निकल रही है। ग्रामीणों ने दावा किया कि निर्माण के दौरान मानकों की अनदेखी की गई, जहां डामर बिछाने से पहले आवश्यक गिट्टी (मेटल) नहीं डाली गई और सीधे मुरुम पर ही डामर बिछा दिया गया, जिससे सड़क कमजोर हो गई।
स्थानीय लोगों ने बताया कि इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही भी सीमित है, इसके बावजूद सड़क का इतनी जल्दी खराब होना गंभीर लापरवाही का संकेत है। ग्रामीणों ने निर्माण एजेंसी और ठेकेदार धर्मेंद्र मिश्रा पर घटिया सामग्री के उपयोग का आरोप लगाया है।
ग्रामीणों ने यह भी कहा कि कोंडागांव जिला भले ही नक्सल मुक्त हो गया हो, लेकिन भ्रष्टाचार से अभी भी मुक्ति नहीं मिल पाई है। उनका आरोप है कि पहले नक्सल प्रभावित क्षेत्र का बहाना बनाकर निरीक्षण में ढिलाई बरती जाती थी, जिसका फायदा उठाकर अब भी निम्न स्तर का निर्माण किया जा रहा है।
इस संबंध में पीएमजीएसवाय के कार्यपालन अभियंता बलराम ठाकुर ने बताया कि कुदुर से तुमड़ीवाल मार्ग का सर्वे वर्ष 2016-17 में हुआ था, लेकिन नक्सल प्रभाव के कारण कार्य शुरू नहीं हो सका था। उन्होंने कहा कि हाल ही में प्रशासन के सहयोग से सड़क का निर्माण कराया गया है।
ठाकुर ने यह भी बताया कि इस सड़क की जांच 19 मार्च को राज्य स्तरीय टीम द्वारा की जा चुकी है और टीम ने कार्य की गुणवत्ता पर संतोष व्यक्त किया है। उनका तर्क है कि नई सड़क को पूरी तरह से स्थापित होने में कुछ समय लगता है।