
जांच में सामने आया कि गिरोह यूट्यूब चैनल, फर्जी प्रोफाइल और कॉल सेंटर के जरिए देशभर के लोगों को शादी के नाम पर फंसाता था। रजिस्ट्रेशन फीस, मीटिंग फीस जैसे बहानों से यूपीआई के जरिए रकम वसूली जाती थी, लेकिन बाद में उन्हें कोई जानकारी या साथी नहीं दिखाया जाता था।
जानिए क्या है पूरा मामला ?
दरअसल, दरोगा पारा क्षेत्र में लोक सेवा केंद्र ‘निधि परिवहन सुविधा केंद्र’ चलाया जा रहा था। पुलिस को सूचना मिली थी कि यहां साइबर फ्रॉड किया जा रहा है। इसी सूचना पर सोमवार दोपहर पुलिस और साइबर टीम ने छापा मारा। मौके पर कई लड़कियां काम करती हुई मिलीं।
जांच में सामने आया कि केंद्र में बाहर से लाइसेंस और दस्तावेज बनाने का काम दिखाया जाता था, जबकि अंदर अलग-अलग कमरों में फर्जी दस्तावेज तैयार किए जाते थे। वहीं वीडियो एडिटिंग और कॉल सेंटर भी संचालित किया जा रहा था, जहां युवतियों के माध्यम से लोगों को शादी के नाम पर फंसाकर उनसे पैसे वसूले जाते थे।
यूट्यूब चैनल, फेक प्रोफाइल और कॉल सेंटर से देशभर में ठगी
गिरोह फर्जी जीमेल आईडी, मोबाइल नंबर और यूट्यूब चैनलों के जरिए नकली प्रोफाइल बनाकर लोगों से संपर्क करता था। इसके बाद रजिस्ट्रेशन फीस, मीटिंग फीस और अन्य बहानों से यूपीआई के माध्यम से रकम वसूली जाती थी।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी कपिल गर्ग पहले लोक सेवा केंद्र के जरिए आरटीओ से जुड़ा काम करता था। आईडी निरस्त होने के बाद उसने यह फर्जी नेटवर्क खड़ा किया। उसके साथ हिमांशु मेहर और अन्य सहयोगी लंबे समय से इस अवैध गतिविधि को चला रहे थे।
मौके से पुलिस को लैपटॉप में फोटोशॉप के जरिए दस्तावेजों में छेड़छाड़ के साक्ष्य मिले। साथ ही अलग-अलग सरकारी विभागों के फर्जी सील और मुहर भी बरामद किए गए हैं।
7,693 लोगों से 1.11 करोड़ की ठगी
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि साल 2022 से अब तक 7,693 लोगों को ठगी का शिकार बनाया गया। करीब 1 करोड़ 11 लाख 36 हजार रुपए की अवैध वसूली की गई। कार्रवाई में 55 मोबाइल, 13 लैपटॉप, 2 प्रिंटर और 3 बैंक खाते जब्त किए गए है।
इस मामले में पुलिस ने कपिल गर्ग, हिमांशु मेहर समेत 26 आरोपियों के खिलाफ धारा 319(2), 336(3), 336(4), 338, 340(2), 61(2), 112(2), 316(2) 318(4) BNS और आईटी एक्ट की धारा 66C, 66D के तहत केस दर्ज किया।
सभी को मंगलवार को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।