
गर्मी की चुनौतियां और रणनीति
गर्मी के मौसम में जंगलों में लगने वाली आग और पानी के स्रोतों के सूखने के कारण अक्सर भालू, तेंदुए, लकड़बग्घे और हाथी जैसे जंगली जानवर मानवीय बस्तियों की ओर पलायन करते हैं। इससे संघर्ष की संभावना बढ़ जाती है। इस चुनौती से निपटने के लिए USTR ने एक सक्रिय और एकीकृत रणनीति अपनाई है:
फायर वॉचर्स टीम: यह टीम नियमित पैदल गश्त करती है और जंगल की आग का पता लगाने व उसे रोकने के लिए थर्मल ड्रोन निगरानी का उपयोग करती है। इनकी सतर्कता के कारण आग लगाने के आरोप में 23 व्यक्तियों को पकड़ा गया है, जिससे आग लगने की घटनाओं में भारी कमी आई है।
वॉटर वॉचर्स टीम: जंगली जानवरों के लिए जंगल के भीतर ही पानी सुनिश्चित करने हेतु व्यापक प्रयास किए गए हैं। आंतरिक वन क्षेत्रों में 750 से अधिक छोटे जल स्रोत, जिन्हें स्थानीय रूप से “झिरिया” कहा जाता है, बनाए गए हैं। इसके अतिरिक्त, चिन्हित हॉटस्पॉट क्षेत्रों में 26 सौर-संचालित पंप स्थापित किए गए हैं। पानी के इस विस्तृत नेटवर्क के कारण वन्यजीव जंगल की सीमाओं के भीतर ही रहते हैं।
अवैध शिकार पर लगाम और तकनीक का उपयोग
ये उपाय अवैध शिकार को रोकने में भी सहायक हैं, क्योंकि शिकारी अक्सर गर्मियों में सीमित जल स्रोतों को निशाना बनाते हैं। USTR की एंटी-पोचिंग टीम ने अंतर-राज्यीय शिकार नेटवर्कों पर कार्रवाई कर रिजर्व में सुरक्षा का माहौल बढ़ाया है। साथ ही, सूखते जल स्रोतों और आग की आशंका वाले क्षेत्रों की निगरानी के लिए सैटेलाइट-आधारित मॉनिटरिंग का उपयोग किया जा रहा है।
उल्लेखनीय परिणाम
इन समन्वित प्रयासों के परिणामस्वरूप, USTR में पिछले तीन गर्मी के मौसमों के दौरान शून्य (जीरो) मानव या वन्यजीव हताहत दर्ज किए गए हैं। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी अवधि में स्थानीय समुदायों द्वारा महुआ, साल बीज, चिरौंजी और तेंदू पत्ता जैसे लघु वनोपज का संग्रहण किया जाता है।
USTR का यह एकीकृत दृष्टिकोण पारिस्थितिक संरक्षण और सामुदायिक सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने का एक आदर्श मॉडल है, जो दर्शाता है कि कैसे लक्षित हस्तक्षेपों के माध्यम से संवेदनशील वन क्षेत्रों में संघर्ष को प्रभावी ढंग से कम किया जा सकता है।