छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में पथरी के ऑपरेशन के बाद आरक्षक की तबीयत बिगड़ने से मौत

Chhattisgarh Crimesछत्तीसगढ़ के बिलासपुर में पथरी के ऑपरेशन के बाद आरक्षक की तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। जिससे नाराज परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया। उनका आरोप है कि इलाज में लापरवाही के चलते मरीज की तबीयत खराब हुई। विरोध और हंगामा को देखते हुए पुलिस ने बीच-बचाव किया।

परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और दोषी डॉक्टर के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की। वहीं, अस्पताल प्रबंधन ने हार्ट अटैक से मौत होना बताया है। मस्तूरी थाना क्षेत्र के ग्राम एरमशाही निवासी सत्यकुमार पाटले (36) पुलिस विभाग में आरक्षक था। उसकी पोस्टिंग सरकंडा थाने में थी। घटना सिविल लाइन थाना क्षेत्र की है।

दरअसल, 26 अप्रैल को उसके पेट में असहनीय दर्द हुआ, जिस पर वो इलाज कराने के लिए नेहरू नगर स्थित श्रीराम केयर अस्पताल पहुंचा। जांच के बाद डॉक्टरों ने उसे बताया कि, उसके पेट में पथरी है, जिसका ऑपरेशन करना पड़ेगा।

सत्या के दोस्त आशीष ने बताया कि, अस्पताल प्रबंधन ने 40 हजार रुपए के पैकेज में उसका ऑपरेशन किया। 28 अप्रैल को उसे भर्ती किया गया। जिसके बाद 29 अप्रैल को ऑपरेशन किया गया। सर्जरी के बाद डॉक्टर ने उसकी स्थिति बेहतर बताया। सत्या भी सामान्य था और बातचीत कर रहा था।

डॉक्टर ने परिजन को बताया कि, ऑपरेशन सफल हो गया है और मरीज खतरे से बाहर है। लेकिन, शुक्रवार की शाम अचानक सत्या की तबीयत बिगड़ने लगी। फिर उसे वेंटिलेटर पर रखा गया और शनिवार दोपहर में उसकी मौत हो गई। उसकी मौत की खबर सुनकर परिजन भड़क गए और अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही बरतने के आरोप लगाने लगे।

गुस्साए परिजनों ने मचाया हंगामा, अस्पताल पहुंचे पुलिस अफसर

आरक्षक की मौत की खबर सुनकर उसके गांव से परिजन अस्पताल पहुंच गए। इस दौरान आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा मचाया। उनका आरोप है कि, इलाज में लापरवाही के चलते उसकी मौत हुई है। विरोध और हंगामे की खबर मिलते ही सिविल लाइन पुलिस की टीम के साथ टीआई एसआर साहू भी अस्पताल पहुंच गए।

जिसके बाद एडिशनल एसपी सिटी पंकज पटेल, एएसपी ग्रामीण मधुलिका सिंह सहित अन्य अधिकारी भी अस्पताल पहुंचे। उन्होंने आरक्षक के परिजन को समझाइश दी। साथ ही जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई करने का भरोसा दिलाया।

अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टर पर FIR करने की मांग पर अड़े परिजन

परिजनों का कहना है कि, इतने बड़े निजी अस्पताल में आधुनिक सुविधाओं और विशेषज्ञ डॉक्टरों के दावे किए जाते हैं, लेकिन एक सामान्य पथरी के ऑपरेशन के बाद मौत होना गंभीर लापरवाही है। उन्होंने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए अस्पताल प्रबंधन और दोषी डॉक्टरों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। FIR नहीं करने पर उन्होंने आंदोलन करने की चेतावनी दी है।

चार-पांच घंटे तक नहीं किया इलाज

आशीष ने बताया कि ऑपरेशन के बाद वह ठीक था। फिर दूसरे दिन अचानक उसे खांसी की शिकायत हुई। इस दौरान परिजन ने अस्पताल स्टाफ को इसकी जानकारी दी। लेकिन, चार-पांच घंटे तक उसका इलाज नहीं किया गया। जिसके चलते उसकी स्थिति गंभीर हो गई।

Exit mobile version