छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई

Chhattisgarh Crimesछत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। इस मामले में उनकी जमानत याचिका पर बहस पूरी हो चुकी थी। हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था। कोर्ट ने चैतन्य बघेल की जमानत को लेकर आदेश जारी कर दिया है।

हाईकोर्ट ने सवाल उठाया कि सह-आरोपी लक्ष्मी नारायण बंसल के बयान पर भरोसा करने के बावजूद, वारंट होते हुए भी उसे गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया। लक्ष्मी नारायण बंसल को खुलेआम घूमने देना जांच की पारदर्शिता पर सवाल उठाता है और कानून के चुनिंदा इस्तेमाल को दर्शाता है।

शराब घोटाला केस में गिरफ्तार चैतन्य बघेल 18 जुलाई से रायपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं। यह राहत उन्हें प्रवर्तन निदेशालय (ED) और छत्तीसगढ़ एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB/EOW) की ओर से दर्ज केसों में मिली है। ED ने चैतन्य को पिछले साल जुलाई में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के सिलसिले में गिरफ्तार किया था, जबकि भ्रष्टाचार के मामले में सितंबर में ACB ने उन्हें तब गिरफ्तार किया जब वे पहले से ही जेल में थे।

जांच एजेंसियों के अनुसार यह घोटाला 2019 से 2022 के बीच हुआ, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा। ED का आरोप है कि चैतन्य बघेल इस पूरे शराब सिंडिकेट के संरक्षक थे और उन्होंने करीब 1,000 करोड़ रुपए का लेन-देन व्यक्तिगत रूप से संभाला।

इसके अलावा ACB का दावा है कि चैतन्य बघेल को हिस्से के तौर पर 200 से 250 करोड़ रुपए मिले और इस पूरे घोटाले की कुल रकम 3,200 करोड़ रुपए से ज्यादा हो सकती है। वहीं बेटे को जमानत मिलने पर पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि सत्य की जीत हुई है। सत्य परेशान हो सकता है। पराजित नहीं हो सकता। समर्थकों ने पटाखे फोड़कर खुशी जताई।

हाईकोर्ट ने DGP को लगाई फटकार

शराब घोटाला केस में हाईकोर्ट ने सह-आरोपी लक्ष्मी नारायण बंसल को अरेस्ट नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि पुलिस ने एक ऐसे आरोपी को भागने का मौका दिया, जिसके खिलाफ पहले से ही परमानेंट वारंट जारी था। पुलिस ने आरोपी को पकड़ने के बजाय केवल उसका बयान दर्ज किया और उसे जाने दिया, जिसके बाद वह फरार हो गया।

कोर्ट ने इसे “कानून का गंभीर उल्लंघन” (Grave violation of law) माना है। साथ ही राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को आदेश दिया है कि वह व्यक्तिगत रूप से इस मामले को देखें। उन्हें यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि राज्य के सभी पुलिस अधिकारियों को निर्देश जारी किए जाएं ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोबारा न हो।

‘चुनिंदा कार्रवाई’ की नीति अपनाई

हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने सह-आरोपी लक्ष्मी नारायण बंसल के बयान पर भरोसा तो किया, लेकिन जब वही आरोपी पुलिस के सामने था और उसके खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट भी मौजूद था, तब पुलिस ने उसे गिरफ्तार क्यों नहीं किया? उसे खुलेआम घूमने की अनुमति देना यह दर्शाता है कि जांच पारदर्शी नहीं है। कानून का ऐसा ‘चुनिंदा इस्तेमाल’ न्याय व्यवस्था के साथ खिलवाड़ है।

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