छत्तीसगढ़ के बिलासपुर के गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी में राष्ट्रीय परिसंवाद में कार्यक्रम के बीच कुलपति प्रो. आलोक चक्रवाल ने अपना आपा खो दिया

Chhattisgarh Crimesछत्तीसगढ़ के बिलासपुर के गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी में राष्ट्रीय परिसंवाद में कार्यक्रम के बीच कुलपति प्रो. आलोक चक्रवाल ने अपना आपा खो दिया। महाराष्ट्र से आए साहित्यकार मनोज रूपड़ा को कार्यक्रम से भगा दिया। इससे नाराज होकर हिंदी के कई लेखक और प्रोफेसर नाराज होकर चले गए।

कार्यक्रम के बीच मंच पर बवाल का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। कुलपति प्रो. आलोक चक्रवाल कहते नजर आ रहे हैं कि वाइस चांसलर से बात करने का तरीका नहीं पता। कुलपति ने संयोजकों को निर्देश दिया कि इन्हें दोबारा कार्यक्रम में कभी न बुलाया जाए।

जानिए क्या है पूरा मामला ?

दरअसल, यूनिवर्सिटी के हिंदी विभाग में नई दिल्ली के साहित्य अकादमी और विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में ‘समकालीन हिंदी कहानी, बदलते जीवन संदर्भ’ विषय पर राष्ट्रीय परिसंवाद का आयोजन किया गया था। इसमें मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा सहित कई राज्यों के साहित्यकार और प्रोफेसर्स को बुलाया गया था।

कार्यक्रम में कुलपति प्रोफेसर आलोक चक्रवाल अपने जीवन के अनुभव और उपलब्धियों का जिक्र करने लगे। बातचीत के दौरान वो गुजराती और बनारसी भाषी सहित अपने व्यक्तिगत जीवन की कहानी बताने लगे। इस दौरान साहित्यकार असहज महसूस करने लगे।

इस दौरान कुलपति चक्रवाल ने कहा कि आप लोग पहली बार मुझे सुन रहे हैं, क्षमा करिएगा कुछ अतिरिक्त हो जाए तो। इसके बाद भी वो कहानी सुनाते रहे। इसी दौरान साहित्यकार मनोज रूपड़ा की तरफ इशारा करते हुए कहा कि भाई साहब आप बोर तो नहीं हो रहे हैं। इस पर साहित्यकार ने कहा कि मुद्दे की बात हो तो बेहतर होगा।

मंच से कहा- इन्हें कुलपति से बात करने की तमीज नहीं, चलिए बाहर

इस दौरान कुलपति चक्रवाल ने साहित्यकार से सख्त लहजे में पूछा कि आपका नाम क्या है। इस पर साहित्यकार ने अपना नाम मनोज रूपड़ा बताया। इसके बाद कहने लगे कि मैं सीधे मुद्दे की बात पर आता हूं। कुलपति ने भड़कते हुए कहा कि बहुत बड़े कहानीकार- विद्यावान बन रहे हो, लेकिन इन्हें तमीज नहीं कि कुलपति से कैसी बात करते हैं।

कुलपति ने उन्हें सभा से बाहर का रास्ता दिखा दिया। इस पर मनोज रूपड़ा उठकर चले गए। इस दौरान कुलपति के इस रवैए को देखकर सभा में मौजूद साहित्यकार और प्रोफेसर विरोध करने लगे। तब उन्हें भी कुलपति ने कह दिया कि उन्हें अच्छा नहीं लग रहा है तो बाहर चले जाएं।

माहौल हुआ गर्म, सभा से उठकर चले गए साहित्यकार और प्रोफेसर्स

नोकझोंक से सभागार का माहौल गर्म हो गया। कई अतिथि असहज हो गए। कार्यक्रम बीच में ही छोड़कर निकल गए। दूसरे राज्यों से आए साहित्यकारों ने इसे “अनुचित” बताते हुए कार्यक्रम का बहिष्कार कर दिया। अकादमिक मंच पर संवाद की जगह विवाद हावी हो गया।

वहीं विश्वविद्यालय के कुछ प्रतिभागियों का कहना था कि मतभेद को शांतिपूर्वक सुलझाया जा सकता था। विवाद के कारण परिसंवाद का फोकस विषय से भटक गया और शेष सत्रों पर भी असर पड़ा। यूनिवर्सिटी में कुलपति के इस रवैए को लेकर कैंपस में दिनभर चर्चा चलती रही।

दैनिक भास्कर डिजिटल की टीम ने विवाद को लेकर आयोजकों से प्रतिक्रिया लेने और कुलपति प्रो. चक्रवाल से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। हालांकि अभी तक इस मामले में विश्वविद्यालय ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। आज रायपुर के अंबेडकर चौक पर साहित्यकारों का प्रदर्शन है।

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