गांजा तस्करी करने वाला जीआरपी का गैंग पकड़ाया : एक आरक्षक सहित 4 तस्करों को दुर्ग पुलिस ने किया गिरफ्तार

Chhattisgarh Crimes

दुर्ग। दुर्ग जीआरपी के सिपाही ने गांजा तस्करी के लिए पूरा का पूरा एक गैंग तैयार कर रखा था। इस गैंग में जीआरपी के कुछ सिपाहियों के साथ ही कई गांजा तस्कर जुड़े थे। इनके द्वारा हर महीने लाखों रुपए के गांजे की तस्करी जिले में की जाती थी। दुर्ग पुलिस ने इस गैंग के चार गांजा तस्करों को गिरफ्तार किया है। इसमें जीआरपी का एक सिपाही भी शामिल है।

मोहन नगर थाना प्रभारी बिपिन रंगारी ने बताया कि उन्हें मुखबिर से सूचना मिली थी कि थाना क्षेत्र अंतर्गत बड़े पैमाने पर गांजा की तस्करी की जा रही है। इस अवैध काम में दुर्ग जीआरपी भी शामिल है। उनके द्वारा रेलवे से गांजा की सप्लाई करवाई जाती है। टीआई ने इसकी जानकारी दुर्ग सीएसपी वैभव बैंकर को दी। सीएसपी ने इसके लिए एक विशेष टीम गठित की। टीम मामले की जांच कर ही रही थी कि 21 मई को उन्हें मुखबिर से सूचना मिली कि कुछ लोग सूर्या होटल के पीछे पीपल के पेड़ के पास बैठे हैं। उनके पास बड़ी मात्रा में गांजा है और वो ग्राहक का इंतजार कर रहे हैं। बिना समय गंवाए मोहन नगर थाने की टीम ने उस जगह को घेर लिया। पुलिस को देखकर आरोपी भागने लगे, लेकिन पुलिस ने 4 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। तलाशी लेने पर उनके पास रखे बैग में गांजा मिला।

राजनांदगांव जीआरपी का सिपाही भी गिरफ्तार

पकड़े गए आरोपियों में एक आरोपी राजनांदगांव जीआरपी का सिपाही है। उसने अपना नाम शैलेष कुमार ध्रुव (34 साल) निवासी रेलवे कॉलोनी दुर्ग बताया। इसके साथ ही तीन अन्य आरोपी गांधी चौक तीतुरडीह दुर्ग निवासी अजय कुमार दुबे (26 साल), शिव मंदिर के पास तीतुरडीह दुर्ग निवासी अरुण कुमार यादव (29 साल) और बम्हनी शुकुल दैहान राजनांदगांव निवासी अजय कुमार वर्मा (30 साल) को भी गिरफ्तार किया है।

दुर्ग जीआरपी का सिपाही है गैंग का सरगना

इस पूरे गांजा तस्करी गैंग का मुख्य सरगना दुर्ग जीआरपी में पदस्थ सिपाही वसीम अहमद निवासी केलाबाड़ी दुर्ग है। गिरफ्तारी जीआरपी के सिपाही शैलेष कुमार ने बताया कि उनके पास जो गांजा जब्त किया गया है उसे वसीम अहमद ने दिया है। उसके द्वारा ट्रेन से गांजा मंगाकर रेलवे एरिया से बाहर निकालकर तस्करों के हवाले किया जाता है। वसीम इससे पहले 5-6 बार गांजा की बड़ी खेप इन आरोपियों के हवाले की है। गांजा बेचकर बिक्री की रकम को वसीम को देते हैं और फिर वो आगे तस्करों तक पहुंचाता है। गांजा पकड़े जाने की खबर लगते ही वसीम ने अपना मोबाइल बंद कर लिया और ड्यूटी छोड़कर फरार हो गया है। दुर्ग पुलिस उसकी तलाश कर रही है।

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