महामाया मंदिर परिसर के कुंड में कछुओं की मौत को लेकर DFO को कड़ी फटकार

Chhattisgarh Crimesछत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने बिलासपुर के रतनपुर स्थित महामाया मंदिर परिसर के कुंड में कछुओं की मौत को लेकर DFO को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि DFO कौन हैं, कितना पढ़े हैं, IFS रैंक के अफसर हैं, उन्हें यह नहीं मालूम कि किस अपराध में क्या मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए।

दरअसल, हाईकोर्ट ने इस केस में गलत FIR दर्ज करने पर नाराजगी जताई। साथ ही मंदिर ट्रस्ट के उपाध्यक्ष को अग्रिम जमानत देने का आदेश दिया।

दरअसल, महामाया मंदिर ट्रस्ट परिसर स्थित में कुंड में 23 कछुओं की मौत हो गई थी, जिस पर वन विभाग ने वन्य जीव संरक्षण अधिनियम की धारा 9 के तहत मंदिर ट्रस्ट के उपाध्यक्ष और पुजारी सतीश शर्मा को आरोपी बनाया है। साथ ही मामले में दो लोगों की गिरफ्तारी भी की है।

DFO को शपथपत्र पेश करने कहा था

वहीं, वन विभाग की टीम सतीश शर्मा की तलाश कर रही है। इस पर सतीश शर्मा ने अपने वकील के माध्यम से हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की है। इस मामले की पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने वन विभाग से डायरी की मंगाई थी। साथ ही मामले में DFO को शपथपत्र प्रस्तुत करने कहा था।

वकील ने कहा- समिति के निर्णय से कराई कुंड की सफाई

सोमवार को चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की सिंगल बेंच में केस की सुनवाई हुई। इस दौरान ट्रस्ट के उपाध्यक्ष सतीश शर्मा के वकील ने बताया कि समिति के निर्णय से कराई कुंड की सफाई कराई गई थी। पढ़िए कोर्ट रूम लाइव-

सतीश शर्मा के वकील- मामले में वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 9 के तहत केस दर्ज किया गया है। यह एक्ट शिकार के लिए होता है। लेकिन, आरोपी सतीश शर्मा पर शिकार का आरोप ही नहीं है। उन पर आरोप है कि उन्होंने सफाई के लिए ताला खुलवाने के लिए परमिशन दी थी,जिसके बाद सफाई के दौरान कछुए मृत पाए गए।

चीफ जस्टिस- कितने बजे सफाई के लिए अनुमति दी गई।

सतीश शर्मा के वकील- रात 12 बजे सफाई के लिए अनुमति दी गई।

चीफ जस्टिस- रात को कौन सी सफाई होती है, जो इतनी रात को ताला खोला गया। इस तरह से तो आप मंदिर की तिजोरी लुटवा देंगे।

सतीश शर्मा के वकील- दिन में नवरात्रि के चलते भक्तों की भीड़ रहती है, इसलिए रात को ही सफाई करवाई जाती है।

सतीश शर्मा ने वकील- वन विभाग ने भले ही शिकार का मामला दर्ज किया है। लेकिन, यह शिकार का मामला है ही नहीं। इस मामले में ना तो शिकार की बात सामने आई है ना ही ट्रैफिकिंग की बात सामने आई है। कछुए कही से लाने या ले जाने के दौरान पकड़े नहीं गए हैं। सफाई के दो दिन बाद बदबू आने पर मृत कछुओं को रिकवर किया गया है। इसमें सफाई कर्मियों से भी किसी तरह के साठगांठ की भी कोई बात मंदिर उपाध्यक्ष के खिलाफ नहीं है।

चीफ जस्टिस- वहां मछली पकड़ने की अनुमति थी क्या? वहां जाल कैसे मिला।

सतीश शर्मा के वकील- वो सफाई के लिए था न कि मछली पकड़ने के लिए। लोग मंदिर परिसर के कुंड में फूल पत्ती डालते हैं, पूजा का सामान विसर्जित करते हैं, कई श्रद्धालु घर से पूजा का सामान लाकर विसर्जित करते हैं। इसमें कई रासायनिक तत्व भी होते है। कुंड में से फूल पत्तियों और रासायनिक सामग्रियों को बाहर निकालने के लिए जाल की जरूरत पड़ती है।

नाराज चीफ जस्टिस बोले- DFO कौन हैं, कितना पढ़ा है

सुनवाई के दौरान DFO सत्यदेव शर्मा की तरफ से शपथ पत्र में पुजारी सतीश शर्मा के खिलाफ वन संरक्षण अधिनियम की धारा 9 के तहत मामला दर्ज करना बताया। इस पर नाराज चीफ जस्टिस ने कहा पूछा कि DFO कौन है, कितना पढ़े हैं, उन्हें यह भी नहीं मालूम कि किस अपराध में क्या केस दर्ज करना चाहिए। DFO ने किस तरह FIR दर्ज की है।

उसके बाद सरकारी वकील ने बताया कि 3 गवाहों के बयान पर अपराध दर्ज किया गया है। वहीं सीसीटीवी फुटेज में भी मामला सामने आया। दोनों पक्षों को सुनते हुए बेंच ने याचिकाकर्ता की जमानत स्वीकार कर ली है।

कुंड में 23 कछुओं की मौत हुई थी

बता दें कि नवरात्र पर्व के पहले 24 मार्च को महामाया मंदिर परिसर स्थित कुंड में 23 कछुओं की मौत हो गई थी। तब बताया गया कि कुंड की सफाई के दौरान मछुआरों ने जाल डाला था, जिसमें फंसने से कछुओं की मौत हुई होगी। लेकिन, यह भी कहा गया कि मछुआरे सफाई के बाद मछली लेकर चले गए थे, जिसके दो दिन बाद कुंड में कछुए जाल में फंसे मिले। हाईकोर्ट ने इस पर आई मीडिया रिपोर्ट को जनहित याचिका मानकर सुनवाई शुरू की है।

दम घुटने से हुई कछुओं की मौत

वन विभाग ने कछुओं का पोस्टमॉर्टम कराया है। पीएम रिपोर्ट में कछुओं की मौत दम घुटने से होने की पुष्टि हुई है। माना जा रहा है कि कुंड में जिस जाल को डाला गया, उसकी जाली पतली थी। जब कछुए इसमें फंसे होंगे तो बाहर निकलने के चक्कर में जाल में फंस गए, जिससे उनका दम घुट गया होगा।

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