
गरियाबंद। जिले के उदंती सीतानदी अभयारण्य के बफर जोन में बसी अवैध बस्ती सोरनामाल महज 24 घंटे में खाली हो गई। इस घटना से खुद वन विभाग भी हैरान है। हैरानी इसलिए, क्योंकि पिछले 2 साल से विभाग इनकी बेदखली के प्रयास में नाकाम रहा था। यहां बाहर से आकर बसे 69 ग्रामीणों ने 188 हेक्टेयर वन भूमि पर कब्जा जमा लिया था।
बता दें कि उदंती सीतानदी अभयारण्य के बफर जोन में स्थित इंदागांव रेंज के कक्ष क्रमांक 1216, 1218 और 1222 में 2008 से सैकड़ों पेड़ काटकर कोयबा के अलवा बाहर से आए ग्रामीणों ने सोरनामाल नाम की बस्ती बसा ली थी। यहां 69 परिवार के लगभग 150 लोग कच्ची झोपड़ी बनाकर रह रहे थे, जिसे 1 अप्रैल की शाम से ग्रामीणों ने खाली करना शुरू कर दिया है। जबकि इनके द्वारा किए गए अतिक्रमण को हटाने के लिए अभयारण्य प्रशासन पिछले 2 सालों से कोशिश कर रहा था, लेकिन हर कोशिश बेकार साबित हो रही थी।
सबसे बड़ी बात तो ये है कि इसी साल 29 मार्च को वन, राजस्व और पुलिस अमला संयुक्त रूप से बेदखली की कार्रवाई करने जा रहा था, लेकिन तब सर्व आदिवासी समाज के बैनर तले इस कार्रवाई का कड़ा विरोध किया गया था। बेजा कब्जाधारी किसी भी हाल में गांव खाली करना नहीं चाहते थे, बुलडोजर न चले, इसलिए बीच बस्ती में बाबा साहब अंबेडकर की मूर्ति की भी स्थापना कर दी थी।
अब बड़ा सवाल ये है कि अचानक क्या हुआ कि पिछले दो दिनों से ग्रामीणों ने खामोशी से अपना सामान समेटकर गांव से जाना शुरू कर दिया है। जिसकी जानकारी वन विभाग और अभयारण्य प्रशासन को भी नहीं है। हालांकि कैमरे पर आने से इनकार करते हुए दबी जुबान में ग्रामीणों ने स्वीकार किया है कि गांव खाली करने का फरमान नक्सलियों ने जारी किया है, क्योंकि सिमटते जंगलों से उनमें गुस्सा है।
ग्रामीणों के चेहरे पर नक्सली फरमान का खौफ भी साफ-साफ दिखाई पड़ा। जिला प्रशासन भी इस घटना से इत्तेफाक तो रखता है, लेकिन इस पर खुलकर कुछ भी बोलने से बच रहा है। हालांकि आदिवासी समाज इसे वन विभाग की साजिश मान रहा है।