छत्तीसगढ़ में कैंसर के बढ़ते मामलों को देखते हुए राज्य सरकार ने इसे नोटिफाइड डिजीज यानी ऐसी बीमारी बना दिया है, जिसके हर मामले की जानकारी सरकार को देना जरूरी होगा। लोक स्वास्थ्य-परिवार कल्याण विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है।
अब सरकारी और निजी अस्पतालों के साथ पैथोलॉजी, रेडियोलॉजी लैब, मेडिकल कॉलेज, डायग्नोस्टिक सेंटर और कैंसर की देखभाल से जुड़े दूसरे संस्थानों को कैंसर के हर पक्के या संदिग्ध केस की जानकारी देनी होगी।
पहचान के एक महीने के भीतर देनी होगी जानकारी
किसी मरीज में कैंसर का पता चलने के बाद संबंधित स्वास्थ्य संस्थान को इसकी जानकारी तय प्रक्रिया के तहत एक महीने के भीतर देनी होगी। अगर किसी मरीज में कैंसर का संदेह है, तो इलाज करने वाले डॉक्टर को उसे जरूरी जांच के लिए भेजना होगा।
जांच में कैंसर की पुष्टि होने के बाद पैथोलॉजिस्ट को तय कैंसर नोटिफिकेशन फॉर्म भरना होगा। इसकी जानकारी भी बीमारी की पहचान होने के एक महीने के अंदर संबंधित प्राधिकारी को देना जरूरी होगा।
अभी कैंसर रजिस्ट्री में जानकारी देना स्वैच्छिक
सरकार के मुताबिक, अभी राज्य में कैंसर के मामलों की जानकारी मुख्य रूप से कैंसर रजिस्ट्री में स्वेच्छा से दी जाती है। इससे कई केस रिकॉर्ड में नहीं आ पाते। नई व्यवस्था से राज्य में कैंसर के मामलों का ज्यादा सही डेटा तैयार हो सकेगा।
इसके लिए कैंसर से जुड़े मामलों का डेटा एक सेंट्रलाइज्ड पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। इससे बीमारी की शुरुआती पहचान, इलाज की व्यवस्था और कैंसर से जुड़ी योजनाएं बनाने में मदद मिलेगी।
डेटा से तय होगी कैंसर की रोकथाम की रणनीति
सरकार इस डेटा का इस्तेमाल कैंसर की रोकथाम और कंट्रोल के लिए पॉलिसी तैयार करने में करेगी। इसके अलावा इलाज की सुविधाएं बढ़ाने, कैंसर रिसर्च और ट्रेनिंग सेंटर स्थापित करने में भी इस जानकारी का इस्तेमाल किया जाएगा।
नई व्यवस्था से राज्य में कैंसर के मामलों की संख्या, बीमारी के फैलाव और इससे होने वाली मौतों में होने वाले बदलावों की निगरानी की जा सकेगी। कैंसर स्क्रीनिंग और इलाज से जुड़े सरकारी कार्यक्रम कितने प्रभावी हैं, इसका भी आकलन किया जा सकेगा।
26 जिलों में डे-केयर कीमोथेरेपी सेंटर
फिलहाल प्रदेश में 3 सरकारी कैंसर अस्पताल और 2 सरकारी रेडियोथेरेपी यूनिट हैं। इसके अलावा 26 जिलों में जिला डे-केयर कीमोथेरेपी सेंटर चल रहे हैं। पांच और जिलों में ऐसे सेंटर खोलने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। स्वास्थ्य केंद्रों में कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए स्क्रीनिंग की सुविधा भी उपलब्ध है।
सरकारी से लेकर निजी अस्पताल तक दायरे में
यह व्यवस्था राज्य और केंद्र सरकार के सभी अस्पतालों, निजी अस्पतालों, डिस्पेंसरी, स्वास्थ्य संस्थानों और सरकारी व निजी मेडिकल कॉलेजों पर लागू होगी। इसके अलावा पैथोलॉजी, हेमेटोलॉजी लैब, इमेजिंग सेंटर, डायग्नोस्टिक सेंटर और कैंसर की देखभाल करने वाली एनजीओ भी इसके दायरे में रहेंगी।
कैंसर के इलाज और जांच से जुड़े डॉक्टर और पैथोलॉजिस्ट की जिम्मेदारी होगी कि वे सामने आने वाले कैंसर के मामलों की जानकारी तय समय में सरकार को उपलब्ध कराएं।
ढाई साल में 17,611 कैंसर केस मिले
राज्य में कैंसर के बढ़ते मामलों का अंदाजा इस आंकड़े से लगाया जा सकता है कि 1 अप्रैल 2024 से जून 2026 के बीच प्रदेश में कैंसर के 17,611 मामले दर्ज किए गए।
इनमें 4,465 मुख कैंसर, 210 गले के कैंसर, 252 जीभ के कैंसर, 1,038 फेफड़ों के कैंसर, 2,633 स्तन कैंसर, 2,200 गर्भाशय कैंसर और 2,560 पेट के कैंसर के मामले शामिल हैं। इसके अलावा दूसरे प्रकार के कैंसर के 4,253 केस दर्ज किए गए।