छत्तीसगढ़ में मानव-हाथी संघर्ष गंभीर समस्या बनी हुई है। पिछले पांच वर्षों (2019-2024) में 90 हाथी और 303 इंसान इस टकराव का शिकार हो चुके हैं। वन विभाग ने संघर्ष रोकने के लिए कई उपाय अपनाए, लेकिन वे कारगर साबित नहीं हुए। हाथियों की मौत करंट, अवैध शिकार और अन्य कारणों से हो रही है, वहीं इंसानों की मौत का मुख्य कारण लापरवाही, सेल्फी लेने की कोशिश, और हाथियों को भगाने जैसी घटनाएं बनी हैं।CG News: किस साल कितनी मौत
2019-20: 77 मौत
2020-21: 42 मौत
2021-22: 64 मौत
2022-23: 59 मौत
2023-24: 51 मौत
कुल : 303CG News: तकनीक के बावजूद समाधान नहीं
वन विभाग ने हाथियों की निगरानी के लिए सेटेलाइट आधारित ‘एलिफेंट ऐप’ शुरू किया है, जिससे उनके मूवमेंट की जानकारी हाथी मित्र दल को दी जाती है। लेकिन इसके बावजूद संघर्ष नहीं थम रहा है।
वन विभाग ने हल्का करंट लगाकर हाथियों को गांवों से दूर रखने की योजना बनाई थी, लेकिन यह धरातल पर लागू नहीं हो सकी।
माना जाता है कि हाथी मधुमक्खियों से डरते हैं, इसलिए जंगल में मधुमक्खियों के छत्ते लगाए गए। लेकिन इसका भी लाभ नहीं हुआ।
जंगल में हाथियों के लिए चारा देने की योजना बनी, ताकि वे गांवों में न घुसें, लेकिन यह भी कारगर नहीं रही।
प्रशिक्षित हाथी, जो बिगड़ैल हाथियों को नियंत्रित करने के लिए कर्नाटक से लाए गए थे, वे भी सफल नहीं हुए।
छह हाथियों को रेडियो कॉलर पहनाया गया था, लेकिन अब किसी भी हाथी के गले में कॉलर नहीं है।
खेतों में पुतले खड़े करने और हाथियों के गले में घंटियां बांधने की योजनाएं भी असफल रहीं।