अबूझमाड़ के बोटेर में नक्सलियों के खिलाफ अब तक का सबसे सफल ऑपरेशन करीब 70 घंटों के बाद थम गया

Chhattisgarh Crimesअबूझमाड़ के बोटेर में नक्सलियों के खिलाफ अब तक का सबसे सफल ऑपरेशन करीब 70 घंटों के बाद थम गया है। जवान सकुशल वापस लौट आए हैं। हालांकि इस दौरान जवान खोटलू राम कार्राम और रमेश हेमला शहीद हो गए। शहीदों के शव को भी ससम्मान नारायणपुर पहुंचा दिया गया है। पूरे सम्मान के साथ अंतिम सलामी दी।

आत्मसमर्पण के बाद ज्वॉइन की थी डीआरजी: दोनों शहीदों ने आत्मसमर्पण करने के बाद डीआरजी ज्वॉइन की थी और लगातार नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन में शामिल हो रहे थे।

जंगलों से निकलना चुनौती: मुठभेड़ के बाद शवों को जंगलों से बाहर निकालना जवानों के लिए एक चुनौती रहा। इसे देखते हुए शवों को हेलीकॉप्टर के जरिए ही जिला मुख्यालय लाया गया।

25 नक्सलियों की पहचान: मारे गए 27 नक्सलियों में से 25 की पहचान कर ली गई है और इन पर करीब साढ़े तीन करोड़ रुपए से ज्यादा का इनाम है। 27 में से करीब पांच नक्सली आंध्र कैडर के हैं।

बासव को चलने में थी दिक्कत बताया जा रहा है कि गगन्ना उर्फ बासव राजू की उम्र 75 साल के करीब है। वह बुजुर्ग और कमजोर हाे चुका ​था। वह कुछ समय पहले ही ओडिशा से अबूझमाड़ आया था। उसे ज्यादा चलने-फिरने में भी दिक्कतें थीं।

जोश में फोर्स…

झीरम में कर्मा की लाश पर नाचे थे यही नक्सली… 12वीं बरसी से 3 दिन पहले उन्हीं की लाश रख जवानों ने जश्न मनाया

‘झीरम में महेंद्र कर्मा समेत नेताओं और जवानों की लाश पर नाचे नक्सली…’ 25 मई 2013 को हुए झीरम कांड की यह तस्वीर आज भी छत्तीसगढ़ के लोगों के जेहन में बसी होगी। एक दिन पहले अबूझमाड़ के जंगलों में भी कुछ ऐसा ही हुआ। लेकिन तस्वीर ठीक उलट थी। माओवादियों के मुखिया बासव राजू समेत 27 नक्सलियों को बहादुर जवानों ने मार गिराया।

इनमें अधिकतर वे जवान थे, जिन्हें कभी बासव राजू और उसकी टीम ने हथियार थमाए थे। नक्सलियों को मारने के बाद जवानों ने भी उनकी लाशें सामने रखकर जश्न मनाया, लेकिन पूरी मर्यादा के साथ। बता दें कि झीरम घाटी में 30 से अधिक लोगों को नक्सलियों ने मार डाला था। देश को दहला देने वाली इस घटना को दो दिन बाद यानी 25 मई को 12 साल पूरे हो जाएंगे। मारे गए नक्सलियों में झीरम कांड का मास्टमाइंड बासव राजू भी शामिल है। तस्वीर अबूझमाड़ के जंगल से।