महाराष्ट्र से एक हाथी कांकेर जिले के पखांजूर में प्रवेश कर गया है। ग्राम मसानकट्टा में दंतैल दिखने के बाद इलाके में अलर्ट जारी कर दिया गया है। वन विभाग द्वारा आसपास के गांवों में मुनादी कर लोगों को सतर्क रहने और रात में बाहर नहीं निकलने की हिदायत दी जा रही है।
मामला कापसी वन परिक्षेत्र का है। इससे पहले भी एक हाथी पखांजूर इलाके में पहुंचा था। उसने एक युवक को कुचल कर मार दिया था। इस घटना के कारण हाथी के आने से क्षेत्र में दहशत का माहौल है।
सुरक्षा के मद्देनजर जिस इलाके में हाथी जा रहा है, उस इलाके में बिजली सप्लाई बंद कर दी गई है। परलकोट इलाके के मसानकट्टा में 10 अगस्त को दोपहर हाथी के पैर के निशान खेतों में मिले। इसके बाद जानकारी मिली कि हाथी महाराष्ट्र से वापस छत्तीसगढ़ की सीमा में आ गया है।
हाथी के छत्तीसगढ़ की सीमा में आने के बाद महाराष्ट्र वन विभाग के कर्मचारियों ने इसकी सूचना कापसी वन परिक्षेत्र को दी। शुरू में हाथियों की संख्या को लेकर भ्रम था। महाराष्ट्र से बताया गया था कि कांकेर जिले में पांच हाथियों ने प्रवेश किया है।
हाथी दिखने के बाद इलाके में अलर्ट
इस सूचना के बाद जिले के वन विभाग का पूरा अमला अलर्ट हो गया। जंगल में पूरी तरह जांच करने के बाद पता चला कि केवल एक ही हाथी पखांजूर इलाके में पहुंचा है। वह वर्तमान में गांव मसानकट्टा के जंगल में है।
हाथी के पदचिन्ह आसपास के गांव के खेतों में भी मिले हैं। उसने कुछ जगहों और पेड़ों को नुकसान पहुंचाया है। मसानकट्टा समेत मरोड़ा, पिनकोडो, बैकुंठपुर, मायापुर, दुर्गापुर और जगन्नाथपुर में वन विभाग लगातार मुनादी कर रहा है।
ग्रामीणों को हाथी से दूरी बनाए रखने की समझाइश दी जा रही है। साथ ही जंगल नहीं जाने और रात में अकेले घर से न निकलने की हिदायत भी दी जा रही है।
जुलाई में पहले भी आ चुका है यही दंतैल
बताया जा रहा है यह वही हाथी है जो जुलाई माह में अंतागढ़ होते हुए महाराष्ट्र की ओर चला गया था। अंतागढ़ में जमकर उत्पात मचाया था। मकानों में तोड़फोड़ किया था, इसके बाद महाराष्ट्र की ओर चला गया था।
इसके पहले भी दो बार हाथी इलाके में आ चुके हैं। सबसे पहले दो हाथी पहुंचे थे। वन परिक्षेत्र अधिकारी देवदत्त तारम ने बताया यह हाथी किस दल का है अबतक स्पष्ट नहीं हुआ है। हाथी ने अब तक किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाया है।