छत्तीसगढ़ शासन के जनसंपर्क विभाग और बस्तर संभाग के जिला प्रशासन की संयुक्त पहल “बस्तर राइजिंग” अब बस्तर की पहचान बनने जा रही है। यह बस्तर की कला, परंपरा, संस्कृति और लोकजीवन को विश्व मंच पर प्रस्तुत करने की एक यात्रा है। “प्लेस ऑफ पॉसिबिलिटी” के संस्थापक पृतुल जैन के नेतृत्व में यह अभियान बस्तर संभाग के सभी जिलों की सकारात्मक कहानियों को उजागर कर रहा है।
अभियान के तहत, “बस्तर राइजिंग” टीम ने कोंडागांव का दौरा किया, जहां उन्होंने जिले की समृद्ध शिल्प परंपरा को करीब से समझा। इस यात्रा का उद्देश्य बस्तर की कला और शिल्प को आधुनिक रचनात्मकता तथा आर्थिक अवसरों से जोड़ना भी है।
टेराकोटा कलाकार अशोक चक्रधारी से टीम की मुलाकात
टीम ने प्रसिद्ध टेराकोटा कलाकार अशोक चक्रधारी से मुलाकात की। उन्होंने बताया कि मिट्टी की हर आकृति धैर्य, अनुभव और सटीकता का परिणाम होती है, एक छोटी सी गलती पूरी मेहनत पर पानी फेर सकती है। टीम ने उनके बनाए प्रसिद्ध “मैजिक दीये” की कार्यप्रणाली को भी समझा।
इसके बाद टीम ने रॉट आयरन कलाकार तिजुराम बघेल से भेंट की। बघेल ने बताया कि यह कला उनके पूर्वजों की धरोहर है, जहाँ एक समय उनके परिवार के लोग पत्थरों को पिघलाकर लोहा निकालते थे और उसी से औजारों व पूजा की वस्तुएँ बनाते थे।
उन्होंने बस्तर के अमुस तिहार (हरेली) पर्व का भी उल्लेख किया, जिसमें घर की चौखट पर लोहे की कील ठोकने की परंपरा आज भी जीवित है। इसे नकारात्मक शक्तियों से रक्षा का प्रतीक माना जाता है।