देशभर में मेडिकल कॉलेज मान्यता के लिए रिश्वतखोरी केस में इन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) ने छत्तीसगढ़ समेत 8 राज्यों में रेड मारी

Chhattisgarh Crimesदेशभर में मेडिकल कॉलेज मान्यता के लिए रिश्वतखोरी केस में इन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) ने छत्तीसगढ़ समेत 8 राज्यों में रेड मारी। इनमें रायपुर का रावतपुरा सरकार मेडिकल कॉलेज भी शामिल था। ED अधिकारियों ने रेड के दौरान कई डिजिटल सबूत जब्त किए हैं।

ED के मुताबिक रावतपुरा सरकार मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर अतुल कुमार तिवारी के घर पूछताछ की गई। रेड के दौरान मोबाइल फोन, DVR, पेन ड्राइव और हार्ड डिस्क जब्त किए गए। बैंक से अकाउंट की जानकारी भी मांगी गई। ED की टेक्निकल टीम सबूतों की जांच कर रही है।

ED के मुताबिक मेडिकल कॉलेज से जुड़े लोगों के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के लोग संपर्क में थे। मंत्रालय के अधिकारियों ने गोपनीय जानकारी लीक की, ताकि जब इंस्पेक्शन टीम आए, तो मेडिकल कॉलेजों के अंदर सब कुछ सेट नजर आए।

मेडिकल कॉलेज में इंस्पेक्शन टीम कॉलेज गई, तो उन्हें नकली मरीजों के एडमिशन, नाम मात्र की फैकल्टी दिखाई गई। अस्पताल की कैपेसिटी भी बढ़ा-चढ़ाकर बताई गई। दलाल अधिकारियों से मिले और उन्हें पैसे दिए, जिससे मेडिकल कॉलेज के पक्ष में गुड रिपोर्ट बन सके।

CBI की FIR के आधार पर ED की कार्रवाई

ED ने यह जांच CBI की नई दिल्ली में AC-III ब्रांच की FIR के आधार पर शुरू की। FIR में प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों, हेल्थ मिनिस्ट्री के अधिकारियों और बिचौलियों के एक नेटवर्क पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।ED के मुताबिक सभी ने मिलकर हेराफेरी की है।

CBI ने पाया कि इंस्पेक्शन से पहले कॉलेजों को कॉन्फिडेंशियल जानकारी लीक की जा रही थी, जिससे वे झूठी तैयारी दिखाकर एक्रेडिटेशन ले रहे थे। ED की टीम ने रावतपुरा सरकार मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर अतुल कुमार तिवारी के घर पूछताछ की है।

डायरेक्टर अतुल को CBI ने अरेस्ट किया था, जो जमानत पर बाहर है। रावतपुरा मेडिकल कॉलेज में सीट बढ़ाने के मामले में पैसों का लेन-देन हवाला के जरिए हुआ था। मामला मनी लॉन्ड्रिंग का था, इसलिए इसमें ED की एंट्री हुई है।

FIR में क्या-क्या आरोप

FIR के अनुसार स्वास्थ्य मंत्रालय और NMC से जुड़े कुछ अधिकारी निजी मेडिकल कॉलेजों को पहले से निरीक्षण की जानकारी पहुंचाते थे। इसके बाद कॉलेज निरीक्षण दल के सामने ऐसे इंतजाम करते थे कि मानकों की पूर्ति दिख सके।

बिचौलियों का पूरा नेटवर्क सक्रिय था, जो कॉलेजों और अधिकारियों के बीच लिंक का काम करता था। निरीक्षण टीमों को रिश्वत दिलवाने के आरोप भी सामने आए हैं। कई कॉलेजों में घोस्ट फैकल्टी यानी फर्जी या नाममात्र की फैकल्टी दिखाई जाती थी।

अब जानिए इंस्पेक्शन पर पहुंची NMC की टीम के बारे में

इसके पहले 30 जून 2025 को श्री रावतपुरा मेडिकल कॉलेज में एनएमसी से डॉक्टर्स की टीम निरीक्षण के लिए आई थी। इनमें डॉ. मंजप्पा सीएन, डॉ. चैत्रा एमएस और डॉ. अशोक शेलके शामिल थे। उस समय रावतपुरा मेडिकल कॉलेज में 150 सीटें थी।

30 जून को NMC की इंस्पेक्शन टीम के 4 सदस्य की टीम छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर स्थित रावतपुरा सरकार इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च पहुंचे थे। SRIMSR के डायरेक्टर अतुल कुमार तिवारी ने इंस्टीट्यूशन के फेवर में रिपोर्ट बनाने के लिए जांच टीम को पैसों का ऑफर किया।

यह ऑफर सीधे डॉक्टर मंजप्पा को दिया गया था, जो कि मांड्या इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंस बेंगलुरु में ऑर्थोपेडिक्स डिपार्टमेंट के HOD है। साथ ही NMC जांच दल क प्रमुख है। डॉ मंजप्पा ने सतीश ए. को हवाला ऑपरेटर से 55 लाख रुपए इकट्ठा करने के निर्देश दिए।

डॉक्टर चैत्रा और अपनी टीम के दूसरे सदस्य को भी इस बात के लिए मनाया और उन्हें बताया कि उनका कमीशन डॉक्टर सतीश उनके घर पर डिलीवर कर देंगे। यह पूरी डील 30 जून को ही हो गई थी।