छत्तीसगढ़ की बहुचर्चित झीरम घाटी हमले को लेकर कांग्रेस में चल रहा विवाद अब और गहरा गया है। पार्टी के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता विकास तिवारी सोमवार को कांग्रेस भवन पहुंचे और झीरम घाटी कांड से जुड़े दस्तावेजी सबूत पेश किए। उन्होंने कारण बताओ नोटिस का लिखित जवाब भी दिया।
कांग्रेस भवन पहुंचने पर विकास तिवारी ने सबसे पहले झीरम घाटी हमले में शहीद हुए कांग्रेस नेताओं को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने दावा किया कि उनके पास ऐसे ठोस सबूत हैं, जिनके आधार पर इस मामले में कई बड़े चेहरों का सच सामने आ सकता है। वे केवल सच्चाई सामने लाना चाहते हैं। इसी उद्देश्य से उन्होंने जांच एजेंसियों को पत्र लिखा था।
पार्टी कार्रवाई के बाद बदला घटनाक्रम
गौरतलब है कि, झीरम घाटी कांड की जांच को लेकर विकास तिवारी ने एनआईए और झीरम जांच आयोग को पत्र लिखकर नार्को टेस्ट कराने की मांग की थी। उन्होंने भाजपा नेताओं के साथ-साथ कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कवासी लखमा का भी नार्को टेस्ट कराने की मांग उठाई थी। इस पत्र के सामने आने के बाद कांग्रेस नेतृत्व नाराज हो गया।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के निर्देश पर पार्टी ने विकास तिवारी को प्रवक्ता पद से हटा दिया। इसके बाद कांग्रेस के प्रभारी महामंत्री मलकीत सिंह गैंदू ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगा था।
कांग्रेस नेताओं में नाराजगी, अनुशासनात्मक कार्रवाई
विकास तिवारी के बयान और पत्र के बाद कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने इसे पार्टी अनुशासन के खिलाफ बताया। पार्टी के भीतर इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग उठी। विवाद बढ़ने पर कांग्रेस ने उन्हें प्रवक्ता पद से हटाते हुए औपचारिक नोटिस जारी किया।
विकास तिवारी ने जांजगीर-चांपा दौरे के दौरान भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के बयान पर सवाल उठाते हुए उनके भी नार्को टेस्ट की मांग की थी। कांग्रेस भवन में पेश किए गए दस्तावेजों और जवाब के बाद अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि पार्टी नेतृत्व इस पर क्या रुख अपनाता है।
वहीं विकास तिवारी का कहना है कि वे पीछे हटने वाले नहीं हैं और झीरम घाटी हमले की सच्चाई सामने लाने के लिए हर स्तर पर लड़ाई जारी रखेंगे।