कवर्धा जिले में 7 करोड़ के धान खराब मामले में जिला प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए संग्रहण केंद्र प्रभारी को निलंबित कर दिया

Chhattisgarh Crimesकवर्धा जिले में 7 करोड़ के धान खराब मामले में जिला प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए संग्रहण केंद्र प्रभारी को निलंबित कर दिया है और डीएमओ अभिषेक मिश्रा को गलत बयानबाजी के आरोप में शोकॉज नोटिस जारी किया है।

जानकारी के मुताबिक, करोड़ों के धान खराब होने का मामला 2024-25 का है। धान शॉर्टेज की समस्या सामने आने के बाद संग्रहण केंद्र प्रभारी प्रीतेश पांडेय को शुरू में हटाया गया था, अब इन्हें निलंबित कर दिया गया।

जिला विपणन अधिकारी (DMO) अभिषेक मिश्रा ने अपने बयान में कहा था कि जो धान खराब हुआ है वह चूहे, दीमक, कीड़े और मौसम की खराबी के कारण हो सकता है। इसी बयान पर प्रशासन ने स्पष्टीकरण मांगा है। वहीं प्रकरण की जांच के लिए एक जांच समिति भी गठित की गई है।

जिला प्रशासन ने कहा- धान की कमी का कारण सूखत

कलेक्टर गोपाल वर्मा ने कहा कि बाजार चारभाठा संग्रहण केंद्र में धान की कमी का मुख्य कारण सूखत का है। चूहों कीड़ों द्वारा खाए जाने वाली बात नहीं है, यह सूखत के कारण है।

सूखत के पिछले 5 सालों की तुलना करें तो 2020-21 में 3.9 प्रतिशत, 2021- 22 में 3.67 प्रतिशत, 2022-23 और 23-24 में संग्रहण नहीं किया गया।

2024-25 में 3.5 प्रतिशत सूखत पाया गया जो पिछले 5 सालों में सबसे कम है। गठित समिति द्वारा जांच के बाद अगर कोई दोषी पाया जाता है उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

क्या है सूखत सूखत यानी धान का सूखना है। एक बोरे में 40 किलो के हिसाब से धान भरा रहता है। जब कस्टम मिलिंग होती है तो ट्रक में लोड होने के बाद धान के तौल में जो अंतर आए वह सूखत की मात्रा होती है।

परिवहन नहीं होने पर सूखता है। नियमों के तहत 40 किलो के बाद बारदाने के वजन के बराबर 680 या 700 ग्राम तक तौल सकते हैं। इससे ज्यादा नहीं तौल सकते हैं। और अगर ज्यादा तौलते तो यह किसानों को होने वाला नुकसान हैं।

जानिए क्या है पूरा मामला ?

दरअसल, कवर्धा में कुल 108 धान खरीदी केंद्र हैं। इनमें से कवर्धा ब्लॉक के बाजार चारभांठा और पंडरिया ब्लॉक के बघर्रा धान खरीदी केंद्र में गड़बड़ी सामने आई। दोनों केंद्रों से करीब 26 हजार क्विंटल धान की कमी पाई गई है, जिसकी बाजार कीमत लगभग 7 करोड़ रुपए आंकी गई है।

इस मामले में जिला विपणन अधिकारी (DMO) अभिषेक मिश्रा ने बताया था कि जो धान खराब हुआ है या उपलब्ध नहीं है। वह चूहे, दीमक, कीड़े और मौसम की खराबी के कारण हो सकता है। उन्होंने कहा कि बघर्रा धान खरीदी केंद्र में जांच चल रही है। जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। इसके बाद विपक्ष ने इसे लेकर प्रदर्शन किया।

इस मामले में कांग्रेस ने कलेक्टर और जिला विपणन अधिकारी से शिकायत की और DMO कार्यालय पहुंचकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने विपणन संघ अधिकारी को चूहा पकड़ने का पिंजरा सौंपते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।

‘भाजपाई चूहा’ ही किसानों का धान खा रहा- कांग्रेस

वहीं कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय ठाकुर ने कहा कि, भाजपा सरकार में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के जिले में 26 हजार क्विंटल धान गायब हो गया है। अधिकारी बेशर्मी से कह रहे हैं कि धान चूहे-दीमक खा गए। यह तर्क हास्यास्पद है। ऐसा लगता है कि ‘भाजपाई चूहा’ ही किसानों का धान खा रहा है।

वहीं इन आरोपी पर भाजपा नेता संजय श्रीवास्तव ने कहा कि, अगर गड़बड़ी हुई है तो जांच के बाद संबंधित अधिकारी-कर्मचारी पर कार्रवाई होगी। भाजपाइयों पर आरोप लगाना गलत है। इतिहास रहा है प्रदेश के अधिकतर घोटालों में कांग्रेसियों के ही नाम सामने आए हैं।

ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग

कांग्रेस पदाधिकारियों ने DMO को ज्ञापन सौंपते हुए जल्द जांच पूरी करने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। साथ ही उन्होंने इस बड़े घोटाले में अधिकारियों और भाजपा के संरक्षण का भी आरोप लगाया।